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वो खूबसूरत थी।
रंग उसका सावला सलोना,
आँखें बिल्कुल तीखी तीखी,
मुस्कान पूरी कातिलाना,
खूबसूरती उसकी सहजता,
परखना उसकी कला,
बेशक लोगोंने गौर फ़र्माया,
रंग से उसको हर बार टोका,
जीत रही थी वो, हार रहे थे सब,
कुछ दिल से हारे,
कुछ सोच से हारे,
इनसब से बेफिक्र वो, 
सिर्फ उड़ना चाहती थी,
रुकना नही उड़ान ऊँची भरना चाहती थी,
मजबूत इरादे थे उसके,
फौलादी जुनून था उसका,
चढ़ रही थी हर एक सीढ़ी वो सावधानी से,
मुकाम तक अपने पहुँच चुकी थी वो,
खुदा की ख़ूबसूरत बनावट थी वो,
अफसोस खुदा को ही प्यारी होगयी थी वो,
बेशक खूबसूरत थी वो।


बंदिशे सारी तोड के निकला हूं,
एक ख्वाब है जो हासिल करने निकला हूं,
होसो-आवाज में इश्क़ का नशा करके बैठा हूं,
उसे पाने की जिद सिर पे सवार करके  बैठा हूं।


महफ़िल लगी हैं,
नुमाइश हो रही हैं दीवाने की।
मुनीब काफी हैं यहाँ,
पैमाइश करने को मुहोब्बत की।


ताखीर ज्यादा तुम ना करोगी,
तारीख ऐसी हमने भी चाही थी।


दरयाफ्त मुहोब्बत की क्या खूब की होगी,
ना मुहोब्बत के पहले ना मुहोब्बत के बाद कोई दरयाफ्त ऐसी पाई गई होगी।


ए ईश्क तुजको खुदा का वास्ता
या यार दे  या मार दे


बात तो सिर्फ जज़्बातों की है
वरना
मोहब्बत तो सात फेरों के बाद भी नहीं होती


सुनो .... सच बताना 
"जान" बूझ कर सताते हो
या जान" लेकर ही मानोगे


वक़्त का  सितम तो देखिए
खुद गुज़र गया हमे वही छोड़ कर

आपसे रुसवा होकर भला हम कहाँ जाएंगे,
आपके ही हैं, ऐसे कैसे भला आपसे जुदा होजाएंगे?
माना हम बार बार रूठ जाते हैं,
पर यकीन मानिए आप प्यारसे हमे मनाये बस यही हम बार बार चाहेंगे।


हां चलो करदेंगे हम तुम्हे अपने आप से दूर,
पर बदले में तुम्हे हमे जहर पिलाना होगा बोलो हैं मंजूर?



नजाकत से पेश आना हमारे दिल से हुजूर,
अभी अभी ये आशियाना हमने आपके नाम किया हैं।


शब्दोंका चयन सोच समझ कर कीजियेगा हुजूर,
इनमे काबिलियत होती हैं कीमती रिश्तोंको  बिखरनेकी या उन्हें और मज़बूत करनेकी।


तलाश ना जानें किसकी है इन आँखों को,
हासिल सब कुछ है मगर तसल्ली फिर भी नहीं...!!
खयाल अगर इतना नेक हैं तो चलो ना दूरियां भी दिलचस्प बनाते हैं।
यकीन मानिए आप, हम आपको इतना टूट कर चाहेंगे कि जमाना चाहकर भी नजदीकियाँ रोक नही पायेगा।


टूट कर चाहेंगे आपको पूरी जिंदगी भर,
आपको अपना बनानेकी  कोशिश होगी ना कभी कम,
मिल जाए अगर साथ आपका आखरी सांस तक,
तो हो जाए पूरी ख्वाहिशें जो मांगी है खुदा से सुबह-साम।


खामखाँ परेशान क्यों है ए दिल,
मेहबूब तेरा मशहूर हैं वफ़ा ए इश्क़ के लिए।


ए वक़्त मुझे थोड़ी देर तन्हा छोड़ दे,
मेरा यार एक मुलाक़ात की आस में हैं।


मौसम आज बगावत पर उतर आया हैं,
कल तक जो पत्थर दिल था आज इश्क़ करने चला हैं।


आज मेरे यार ने मुझसे बगावत की,
वजह सुनी मैंने , दोस्ती थी।
एक ऐसे दोस्त का प्यार देख ,
हमने भी उनसे दोस्ती करली।


तन की सुंदरता तो, दर्पण में निहार लोगे।
मन की सुंदरता निहारने के लिए दर्पण कहासे लाओगे?


माना कि नारी होती हैं दर्पण समान 
टुटके बिखर जाती हैं वो कई बार ,
पर भूल कैसे जाते हैं लोग,
टूटा हुआ काँच चुभता भी बहुत तेज हैं।


दर्पण सी थी वो सच्ची साथी,
हर बार सच्ची राह दिखाया करती थी,
मेरे टूटने पर खुद भी टूट जाया करती थी,
पर टूट कर भी लड़ना हालातोंसे  सिखलाती थी,
मेरी हर हसीं की वजह, दुख में मेरे शामिल थी,
दर्पण सी वो कोई और नही मेरी माँ थी।


जिस्मानी इश्क़ की इस दुनिया मे उनका नूर भी रूहानी था,
इस मतलबी सी दुनिया मे उनका किरदार किसी कयामत से कम नही था।


वो एक अनजानी सी पहेली हो,
जो अपनी हर अदा से नूर छलकाती हो।
 
वो कुछ ऐसी खुदा की बनावट हो,
जो बस मेरे ही लिए बनी हो।


कुछ ऐसे दो दिलोंकी मुलाक़ात हुई,
पहले तीखी तीखी तकरार
फिर मीठी मीठी बातें हुई
कुछ इसकदर दोनों की फिर मुलाकाते हुई,
दोनोंकी रूह इश्क़ में बैचैन हुई
दास्तान दोनोंकी थोड़ी मुश्किल जरूर हुई
पर जीत आखिर मुहोब्बत की ही हुई।


तेरी  मोहब्बत से, तो तेरी यादें अच्छी है 
रूलाती तो है, पर हमेशा साथ तो रहती है


अदायें सीख लीं तुमनें,नज़र से क़त्ल करने की,
मगर तालीम न सीखी,किसी से इश्क़ करने की.....


गरीब हूँ मगर ख़ुश बहुत हूँ
क्योंकि दिल के अमीर
दोस्तों के साथ रहता हूँ 


मेरी मोहब्बत मेरी ज़िंदगी  मेरी आशिक़ी
लफ्ज़ देखो तो हज़ार है.. अगर
 समेट दूँ तो सिर्फ तुम हो


याद है मुझे मेरी हर एक❌ गलती,
एक तो मोहब्बत कर ली,
दुसरी तुमसे कर ली
तिसरी बेपनाह कर ली


लम्हे फुर्सत के आएं तो, रंजिशें भुला देना दोस्तों
किसी को नहीं खबर कि सांसों  की मोहलत कहाँ तक है


दिल की हालत बताई नहीं जाती, 
हमसे उनकी चाहत छुपाई नहीं जाती, 
बस एक याद बची है उनके जाने के बाद, 
वो याद भी दिल से निकाली नहीं जाती।


तुम्हारी बेरुखी के बाद खुद से भी बेरुखी सी हो गई
मैं जिंदगी से और जिंदगी मुझसे अजनबी सी हो गई




दिल मे ना सही, कदमों मे ही सही,
जगह तो दी उसने,
ऐ अल्लाह तेरा लाख शुकर है
कहीं से तो शुरुवात की उसने


तुम गुज़ार ही लोगे ज़िन्दगी, हर फन में माहिर हो
पर मुझे तो कुछ भी नहीं आता, तुम्हे चाहने के सिवा


काश तुम समझ सको कभी हालात मेरे...!!!
एक खालीपन है जो तेरे बिना भरता ही नहीं...!!!*


मोहब्बत और मौत की  पसंद तो देखिए ……*
एक को दिल चाहिए  और दूसरे को धड़कन.........*


Wo Sath The to Ek lafj na nilkala Laboo se,
Dur kya huye Kalam ne keher macha diya..!


ज़रूरी नहीं कि सब कुछ हासिल ही हो जाये, 
कुछ क़िस्से दिल मे ही धड़कते रह जाते हैं 


अगर इतनी ही  नफ़रत है हमसे तो  दिल से
ऐसी  दुआ कर दो
के  तुम्हारी दुआ भी पूरी हो जाए औरमेरी  ज़िन्दगी भhi
हिसाब का कच्चा होना ज़िन्दगी में भी दगा दे गया मुझे
उसने जरा सा चाहा मैंने खुद को पूरा दे दिया उसे


दर्द बहुत लिखा है जनाब ,
जिंदगी की किताब में
खोलना भी मत
सह नहीं पाओगे ......


काश तुम समझ पाते मेरे अनकहे अल्फ़ाज़ों को 
तो ये एहसास स्याही और काग़ज़ के मोहताज ना होते


सोचा न था वो इंसान भी छोड़ कर चला जायेगा, जो मुझे मायूस देखकर कहता था “मे हूँ ना"


इश्क़ज़िंदगी बदल देता है मिल जाये तब भी और ना मिले तब भी


कितनी “कशिश” है इस मोहब्बत  में
लोग रोते है मगर फिर भी  करते हैं


टूटे हुए दिल भी धड़कते है उम्रभर
चाहे किसी की याद में या फिर किसी फ़रियाद में


मेरे होठों पे उँगलियाँ क्यूँ रख दी तुमन सनम
चुप ही कराना था तो होठ रख दिए होते 


प्यार करना हर किसी के बस की बात नहीं
जिगर चाहिए अपनी ही खुशियां बर्बाद करने के लिए।
 

इतना दिल से ना लगाया करो मेरी बातो को,
कोई बात दिल में रह गई तो हमे भुला नहीं पाओगे।


बडी लम्बी खामोशी से गुजरा हूँ मै
किसी से कुछ कहने की कोशिश मे।


दिलों में बने रहना ही सच्ची शोहरत है
वरना मशहूर तो कुछ बुरा करके भी हुआ जा सकता है


गुस्से में जो छोड़ जाये वो वापस आ सकता है
मुस्कुराकर छोड़कर जाने वाला कभी वापस नही आता


वो याद आयी कुछ यूँ, कि लौट आए सब सिलसिले, 
ठन्डी हवा, पीले पत्ते और फ़रवरी के ये दिन..


उसका वादा भी अजीब था की ज़िन्दगी भर साथ निभाएंगे 
मैंने ये नहीं पूछा की मोहब्बत के साथ या यादो के साथ.


मौहब्बत की मिसाल में,बस इतना ही कहूँगा
बेमिसाल सज़ा है,किसी बेगुनाह के लिए


बेफिक्री की उस नींद को तरस गये
जो बचपन मे हम बेहिसाब सोते  थे....


ये दिल न जाने क्या कर बैठा 
मुझसे बिना पूछे ही फैसला कर बैठा 


खुद हो कर नाजुक सा 
आप जैसे चाँद से प्यार कर बैठा


काश कभी तो मेरी कोई दूआ कबूल होने के काबिल हो
मै रात को ख़्वाब में देखु तुम्हें और सुबह तुम मेरी जिंदगी में शामिल हो


हमें देखकर वो जो दिलसे मुस्कुराते हैं,
कभी उन्हें मायूस ना करना खुदा,
बस इतना करना मुहोब्बत के लिए,
हमें लिख देना उनकी किस्मत में सदा के लिए।


कमाल करते है ये Mobile Network वाले भी,
एक तो कभी कभार वो हमसे Call पर बतियाते है,
तभी कम्बख़त Network "Mr. India" बन जाता है।


उफ्फ, क्या कहने हमारे मेहबूब के,
लबोंको बिना छुए ही,
हमारे रूह को चूम गए।


हम उनसे उनकी शिकायत करे भी तो कैसे,
हमारे होठोंकी जरासी हलचल होती हैं,
और वो अपने होठोंसे उन्हें सील देते हैं।


बार बार मुलाकाते हमारी नही होती,
पर इससे मुहोब्बत हमारी कम नही होती,
कभी कभी बाते तक ठीक से नही होती,
पर इससे हमारे बीच दूरियां नही आती,
लम्बा हैं फासला , घरोंकी छत एक दूजे से नही मिलती,
पर इससे दो दिलोंकी कहानी रुक नही जाती,
अलग अलग हैं शहर, किस्मत कभी किसीका नही सुनती,
पर इससे हमारी चाहत कम नही होती,
छोटे मोटे झगड़े होते हैं ग़ुस्से में कभी कभी बात भी बिगड़ जाती,
पर एक दूजे से दूरी हमें रास नही आती,
कहते हैं मुहोब्बत हर किसी को मुक्कमल नही होती,
मुक्कमल हो या ना हो, मेरे महबूब तुम्हारे अलावा मेरी मुहोब्बत किसीके हक़ में ना होगी।


प्रेम , मुहोब्बत सब मोह माया लगा करता था,
जब तक मेरे साहब आपने मेरी जिंदगी में अपने कदम नही रखे थे।


हम थोडेसे खफा क्या होगये उनसे,
होठोंपर हमारे शामत ही आगई।


तुम मेरे नसीब में हो या ना हो,
क्या फर्क पड़ता हैं?
तुम मेरी रूह, मेरे दिल मे हो,
क्या इस से बड़ी कोई बात हैं?


सुनो, यूँ दूर जाने की बात ना किया करो,
मुझे आदत हैं तुम में मशगुल रहने की,
मेरी तपस्या में खलल ना डाला करो।


तसव्वुर में मेरी हर रोज तुम्हारी एक मूरत बनती हैं,
हो जाऊ मैं बस तुम में तल्लीन , तस्कीन इस दिल को फिर भी नही मिलता हैं।


तुम ख्वाबों में हो या हकीकत में हो,
तुम मेरे जेहन में हो या मेरे वजूद में हो,
तुम मेरे बातोंमें हो या मेरे अल्फाजोंमे हो,
तुम मेरे शायरी में हो या मेरी कविता में हो,
तुम मेरे रश्क़ में हो या मेरी मुहोब्बत में हो,
तुम जैसे भी हो, तसल्ली हैं कि तुम हो।


रही बात नफरत की तो वो रिश्ता पूरा ही अलग हैं,
हमें तुमसे मुहोब्बत थी, हैं और रहेगी ये किस्सा ही अलग हैं।


अजीब हैं ना,
पास तुम आते नही,
सब्र हमसे होता नही।


दिल के भीतर बड़ी बैचैनी हैं
जिंदगी के भीतर फिर भी चैन हैं,
तुम मेरे पास नही इससे थोड़ी शिकायत हैं,
तुम मेरे जिंदगी में जिंदगी बनकर हो इसी बात से सुकून हैं।


मसला ये नही की तुमसे मुहोब्बत हैं,
मसला ये हैं कि सिर्फ तुमसे ही हैं बेहद हैं 


दरअसल एक बात पूछनी थी, क्या इजाजत हैं?
थोड़ा सा सुकून चाहिए, क्या तुम्हें हमारी मुहोब्बत कबूल हैं?


हर एक मुहोब्बत की अपनी अलग कहानी हैं,
किसी से कम किसी से ज्यादा, भाई मुहोब्बत हैं, salary थोड़ी हैं ।


क्या ही वो लोग मुहोब्बत निभा ते होंगे
जो मुहोब्बत के नाम पर माँ-बाप का दामन छोड़ते होंगे।


तुम्हे जमानेकी पड़ी हैं ,
पर जमानेको किसकी पड़ी है।


या तो कुछ बनलो फिर मुहोब्बत के झमेले में पडो,
या मुहोब्बत होजाए तो साथ मिलकर सफलता के आसमाँ को छुलो।


ये जो तन्हाई का आलम हैं,
साहब यही मुहोब्बत का अंजाम हैं।


खता होती मुहोब्बत तो सही सलामत लौट आते,
गुनाह हैं मुहोब्बत कब्र में भी सुकून नही मिलता हैं।


वो भाग जाने की फिराक़ में था,
पर किस्मत ने उसे मुझे ही बक्शा था।
वो राह तके मुंतज़िर खडा था,
पर तक़दीर ने उसे मेरी ही मंजिल लिखा था।


सितम पे सितम ढाए जा रहे हो,
लगता हैं मुहोब्बत ने जकड़ रखा हैं ।


नादानियों ने ही सम्भाला हैं,
वरना जिंदगी तो मार ही डालती।


वक़्त सारा तो इंतजार करने में गुजर जाता हैं,
अब तुम ही बताओ मुहोब्बत करूँ की इंतजार करू ।


इंतजार इतना लंबा की जिंदगी रुठ जाए,
मुहोब्बत इतनी गहरी की इंतजार भी कुबूल किया जाए।


जिंदगी की सियासत में नवाब भले ही किस्मत हो,
पर हमने भी गद्दी सिकन्दर की पाल रक्खी हैं।


आज का नया सूरज, नई उम्मीद की किरण लाया है,
तुम खुदको आजमाना सिखलो, फिर हर रोज सफलता की सुबह होगी।


ये कैसी अफवाह फैल रही हैं जमाने मे
मुहोब्बत सस्ती होती जा रही है और वफ़ा महंगी।



तदबीर में कोई कमी नही आनी चाहिए,
तकदीर का क्या हैं, बदल ही जाएगी।


मुहोब्बत मेरी लत बन चुकी हैं,
और तुम मेरी आदत बन चुकी हो।


आसमां में चांद तो एक ही होता है,
पर किसीके लिए मेहबूब, किसीके लिए चूड़ी का टूटा हुआ टुकड़ा होता है।


रात के भी अपने अलग ही अंदाज हैं,
कभी वीरानी तो कभी तूफानी सौगात हैं।


वो वाकई बहुत खूबसूरत हैं,
जिसकी आँखों से पानी बरसने लगता है,
किसी अनजान का भी दर्द देखकर, महसूस कर।


बड़ी होशियारी से उन्होंने मेरे कत्ल की चाले चली,
आँखोंमें कजरा डाल होठोंसे हल्की मुस्कान कर दी।


उफ्फ कैसी कैसी जाक्ति करते हैं,
गुस्सा भी अपना मेरे बेकसूर होठों पर ही निकालते हैं।


कुछ बाते कभी बताई नही जाती,
महसूस की जाती हैं,
मुहोब्बत कभी दिखाई नही जाती,
उनकी हरकतों में झलकती जाती हैं।


तुम मेरे जिंदगी में नमक की तरह जरूरी हो,
तुम ना हो तो जिंदगी का स्वाद ही बिगड़ जाए।


वो हमसे बगावत करने चले थे,
हमने उनसे रिश्ता तोड़ उन्हें आबाद करदिया।


जिंदगी में कभी कभी भूल होजाती है इंसान से,
मुहोब्बत बस में कहा हो जाती हैं अनजाने में इंसान से।


हमसे रब्त सोच समझ कर बनाइयेगा हुजूर,
दिल्लगी अगर आपको हमसे होगयी तो भला इसमें हमारा क्या कुसूर।


महज एक प्यादा ही तो हो तुम,
कफ़न ने गले लगाया और काम तमाम।


वक़्त से बेरुखी अच्छी नही साहब,
वक़्त ही रूठ गया तो मुश्किल होगा जीना।


हाए ये कैसा मातम छाया हैं चारों और,
बेबसी, बेरुखी और लाचारी का कैसा आया हैं ये दौर?


पहले भी नजरे चुराते थे वो हमसे,
दावा मुहोब्बत का  करते थे,
खैर वो बात ही अलग है।


थोड़ी सी उर्दू क्या आने लगी खुदको ग़ालिब समझ लिया,
एक मर्तबा दिल क्या टूटा खुदको देवदास समझ लिया?


दिल के मकान में जगह खाली थी,
हमने तुम्हारे नाम कर दी।
थोड़ी मरहम्मद की जरूरत हैं इसे,
लो हमने ये जिम्मेदारी भी तुम्हारे नाम करदी।


ये मस्तमौला आलम ,
 ये आवारा समा,
ये दीवानगी की धुन,
उसमे मदहोश बलमा।


मोहलत ही तो नही हैं वक़्त के पास,
और बिता वक़्त लौटा सके इतनी भी दौलत नही हैं आदमी के पास।


अनजान सा कोई वो शक़्स हैं,
जिसमे गुमनाम सा मेरा अक्स हैं।


न जाने क्यों तुमसे नफरत करने को जी चाहता हैं,
जिक्र तुम्हारा होता हैं और एक बार फिर ये इश्क़ ही जीत जाता हैं।


उसे मंजिल की पड़ी थी,
मैं तो बस उसके साथ सफर लंबा चाह रही थी।


दिल नही मानो मयखाना हो,
नशा हो तुम,
नशे में हैं हम।


मुहोब्बत को तेजाब से कम ना समझ,
तेरी तबियत को जला कर ही मानेगी ये मुहोब्बत,
 इसे बहता पानी ना समझ।


महज एक इत्तेफाक था, 
हमें उनसे प्यार था,
बस इतना ही काफी था,
आबाद सी जिंदगी जीनेवाला आज बरबाद था।


तुम्हे मुहोब्बत नापनी हैं?
कोई बात नही,
तुम आसमाँ में तारे कितने हैं वही गिनके बतादो,
तुम्हारे नापनेकी काबिलियत पर शक हैं हमे।


मुहोब्बत तब तक सच्ची नही लगती,
जब तक आपबीती ना हो।


आग के दरिया में भी हम हमारी मंजिल ढूंढ लेंगे,
दुनिया मे आये हैं तो कुछ बन के ही जाएंगे।


तलब हैं जिंदगी की,
जिंदा रहनेकी,
लड़ाई जारी हैं इंसान की,
उसके विकृति की,
मौत भी डरती हैं अमीरी से,
जिंदगियां जा रही हैं गरीब की ।


ना दवाओं में दम हैं ना दुवाओं में,
मर रहे हैं लोग मदहम मदहम
ना चितामें कोई फर्क हैं ना चिंता में,
मरहम ही देती जा रही जख्म पे जख्म।


तौहीन पे तौहीन किये जा रहे हो,
और तुम्हे इज्जत बक्श रही हूं मैं,
माफ करना जनाब, अच्छी ख्वाहिश हैं,
पर इतनी भी संस्कारी नही हूँ मैं।


तुम्हारी मुहोब्बत ने मुझे बेजार कर रखा हैं,
मुहोब्बत का मेरे नाम पूरा बाजार कर रखा हैं।


लाख लगालो नकाब तुम,
आईने से कभी असलियत छुपी हैं क्या?


बोसा की तलब,
तलब ये जालिम,
जालिम ये मेहबूब,
मेहबूब ये कातिल,
कातिल ये अदा,
अदा ये आँखे,
आँखे ये ख़ंजर।


वो मेरी आदत में एक परहेज लीख गया,
मेरी चाहत में वो अपना नाम लिख गया।


लिखना तो हम महज एक शेर चाहते थे,
पर तुम एक खूबसरत गजल की हकदार थी।


मुहोब्बत हावी होजाती है मुझ पर,
जब जिक्र तुम्हारा होता हैं।
हैवानियत हावी होजाती हैं मुझ पर,
जब जिक्र तुम्हारा किसी गैर से होता हैं।


किसी और से मुहोब्बत बाँटि तो नही तेरी खैर,
इजाजत दे मुझे अब , सोजा तू भी, शब्बा खैर।


तुम्हारी मुहोब्बत मुझे जरा ज्यादा ही रास आगयी हैं,
तुम्हारी हसरत करके मिली तन्हाई भी मुझे भा गयी हैं।


तलब हैं उनसे रूबरू होने की,
यूँ तो बीमार नही पर उनसे दिल हार आया हूँ मैं।
सुना हैं दिल के मरीजोंका मुफ्त इलाज करती हैं,
बस उसी चारागर से मिलनेका नया बहाना ढूंढ लाया हूँ मैं।


वो मुहोब्बत हैं जनाब
लाख मोडलो मुँह तुम।
अगले पल उसकी आगोश में होंगे,
फिर चाहें कई लगालो पहरे तुम।


अपने जज्बातोंके कातिल तुम खुद ही रहोगे,
जब तुम किसी पत्थर दिल से दिल्लगी करते रहोगे।


वक़्त बेवक़्त हमारी चौखट पर चले आते हो,
जालिम फिर भी हमहिसे बेरूखी, कमाल ही करते हो।


सुना हैं तौर तरीकोंके पक्के हो,
सच बताना कही किसीसे मुहोब्बत तो नही कर बैठे हो।


वो मुहोब्बत अलग ही परवान चढ़ती हैं,
जिसमें जुदाई का मौसम लम्बा ठहरा हो।


ऐब अगर क़बा में हो तो शायद धूल जाए,
नियत में पड़ी ऐब को भला कोई क्याही मिटा पाए।


तुम जो यूँ मुहोब्बत बरसाते हो ना मुझ पर,
बस इसीने आदते बिगाड़ रखी है मेरी।


रंजीशे बताओ किस रिश्ते में नही होती,
साजिशें होने लगी तो सोचो रिश्ते का वजूद ही मिट गया ।


हां माना कि हम बेवकूफ हैं करली मुहोब्बत,
तुम तो समझदार थे ना फिर क्यों कि मुहोब्बत?


जमाने का क्या हैं,
हर मशहूर इंसान के पीछे पागल हैं।
पर हमारा क्या हैं,
हम सिर्फ अपने आप मे ही मशगूल हैं।


हजारो चीखे, लाखो जख्म
एक वक्त के आड़ छुपे हैं,
तुमने फिर दिए हैं घाव कई,
इस बार वक़्त तुम्हे छुपाने पर तुला हैं।


बहुत ही समझदार हैं लोग इस दुनिया मे,
खुद को ना समझ आये कुछ तो दुनिया ही 
ना-समझ हैं इनकी नजर में।


काफी मशक्कत के बाद मैंने दिल को संभाला था,
और उनकी फ़क़त एक मुस्कान मेरा दिल फतेह कर गई।


तुम भूल ही गए हो तो अब शिकायत कैसी,
मुस्कुराती तो हूँ मैं, पर जो महसूस हो रही हैं वो कैफियत कैसी।


गुलशन की खूबसूरती के आगे,
उसके बागबान को भूल जाते हैं लोग,
अफवाहों के भंवर में फस कर,
असलियत टटोलना भूल जाते हैं लोग।


खूबसूरत वो नही उसका हर अंदाज हैं,
मासूम सी उसकी मुस्कान ही मेरे बेचैन दिल का राज हैं।


तुम्हारे मुहोब्बत की बारिश में भीग जाउ,
तुम्हारे इंतजार की धूप में जल भी जाउ,
तुम्हारी महक इन हवाओंसे चुरा लाऊ,
तुम्हारी अदा इन फिजाओंसे छीन लाऊ,
तुम्हारे जिंदगी में कुछ इस तरह मैं जरूरी हो जाऊ,
तुम्हारा जिक्र होते ही पहचानी मैं जाउ।


बाहर गहरा सन्नाटा व खामोशी,
अंदर तूफान सा शोर,
मुहोब्बत के यही सितम हैं,
मेहबूब के आगे किसका चला हैं जोर।


मुहोब्बत कर के दिल टुटनेसे डरते हो,
गम की बारिश से घबराते हो,
ये तो वही बात हुई कि ,
आग में गिरो और जलो भी नही.......
वाह क्या कमाल सोचते हो।


आझाद पंछी हूँ मैं,
मुझे बंदिशों में जखड़ने की कोशिश न कर,
उड़ना पसन्द हैं मेरी,
मुझे पिंजरे में कैद करनेकी कोशिश न कर।


तुम मुस्कुराती हो तो लगता हैं दिल को सुकून मिल गया,
तुम्हे मुस्कुराती हुई कोई और देखले तो लगता हैं दिल मे ज्वालामुखी फुट गया।


जिंदगी अपने रफ्तार से चल रही हैं,
हम अपनी रफ्तार से चल रहे हैं,
और वक़्त........?
वो तो बस मजे ले रहा हैं।


एक ही पल में नजरोंसे नजरे टकरा गई,
जो हम करना नही चाहते थे हमसे वो खता होगई।


यूँ तो मुहोब्बत मुझे कुछ खास रास नही आती,
पर तुमसे मुलाक़ात क्या हुई हमारी अक्स तक आपकी होगई।


सोचा कभी था ही नही की कोई राज करेगा हमारे दिल पर,
पर कुछ पल की जुदाई हमें हमेशा के लिए  आपकी कर्जदार कर गई।


कुछ तब्दीलियां जिंदगी में यूं हँसी हुई, फासला वक़्त में, नजदीकियां दिलोमे बढ़ गई,
वृन्दा ,वृन्दा ना रही 
कुछ इसकदर वो आप मे समा गई।


सरहदे जमीं की होती होगी,
दिल की कोई सरहद नही होती।
खून फिर भी बहता हैं जनाब,
मुहोब्बत की जंग इतनी भी आसान नही होती।


मेरी ताक़त का तुझे अभी अंदाजा नही हैं,
जिन बातोंसे  बाजीगर भी रोदे मैने उन बातों को मुस्कुराकर सहा हैं।


दुनियादारी से सहूलियत मिल जाए तो बताना,
हम आपसे इश्क़ फरमाना चाहते हैं वक़्त हो तो बताना।


दुनियादारी का नशा अब सस्ता होने लगा हैं,
कुछ इस तरह अकेलेपन का सूरुर मुझे रास आगया है।


हम तो सफर का लुफ्त उठा रहे थे,
तुमसे निगाहे मिलने की ही तो देरी थी,
हम खुद ही खुदको लुटा देते तुम पर ,
पर तुम्हे तो राहजनी की जल्दी थी।


ये कैसा रोग लगा हैं इस दुनिया को,
यहां अपने ही खाएं जा रहे हैं अपनों को,
यूँ तो पहले भी कहा फुर्सत थी बाते बनाने से लोगोंको,
यहा जिंदगी का पता नही, और मौत की कीमत लगाते हैं,
थोड़ी तो शर्म आए पैसोंके लुटेरों को।


मुहोब्बत करना चाहते हो तुम?
काँटो पर चलना तो सीखो ।
इबादत करना चाहते हो तुम?
जनाब, उस काबिल तो बनो।


छोटी छोटी बातें होती हैं,
बड़े बड़े रिश्तोंको आसानी से तोड़ देती हैं।


पल भर की मुलाक़ात थी हम दोनोंकी,
जिंदगी बदल गयी हम दो दिलोंकी।


मुहोब्बत की बरसात तो बेमौसम होती हैं,
मौसमी तो बीमारियाँ भी होती हैं।


वो कह रहा था उसकी आँखोंमें दुनिया बसी हैं,
गौर से देखा मैने तो  देखा उसकी आँखोंमें सूरत मेरी बसी हैं ।


पहली ही मुलाकात में वो हमें हमसे चुरा ले गया,
खैर दिल तो हार ही चुके थे हम वो हमें अपनी मुहोब्बत में जीता गया।


दिल की तो बात ही अजब हैं,
उन्हीके लिया धड़कता है जो नही उसका नसीब हैं।


मुहोब्बत के जिक्र से भी जिन्हें नफरत हैं,
इस दिल को उन्हींसे मुहोब्बत हैं।


खाली वक़्त में सड़कों पर बेवजह घूम के देखा हैं क्या?
खाली वक़्त में अपनोंसे गप्पे लड़ाके देखा हैं क्या?
चलो माना बहुत मुश्किल है ये सब करना,
खाली वक़्त में कभी खुदसे मुलाक़ात करके देखा हैं क्या?


कुछ बाते हमारे हाथ से छूट जाती हैं,
कुछ रिश्ते टूट कर बिखर जाते हैं,
कुछ अपने बेगाने बनकर रूठ जाते हैं,
ये जिंदगी बड़ी सख्त हैं जनाब,
रुला के ही मानती हैं।


महज एक नफ़स ही काफी है,
उगाने फसल मुहोब्बत की।
महज एक राज ही काफ़ी हैं,
जलाने फसल मुहोब्बत की।


ख्वाहिशे हमारी कुछ महँगी हैं,
जनाब, 
पूरी कर पाना तुम्हारे बस की बात नही हैं।

तन्हाइयों से हमारी दोस्ती हैं पुरानी,
सुनो,
रास ना आएगी तुम्हें अड़ियल दोस्ती हमारी।


नारी के साहस से जब जब विचलित मन नर का हुआ,
उसे डरा-सहमाए रखना नर को जरूरी लगा।


ज्वालामुखी के मुख को दबोचे कब तक रखता,
जल कर खुद ही उसमे खाक हुआ।



प्रेम , मुहोब्बत , इश्क़ सब कहनेकी बातें होती हैं,
जब तक स्वयं को इश्क़ की आग जला नही देती हैं।


उनकी यादोंका इंतिशार मुझे रातोंमें सोने नही देता,
ए दिल तू उनका इंतजार करना छोड़ क्यों नही देता?


तुम जिसे चाहो , वक़्त उसका कभी देखा नही जाता,
अच्छा हो या बुरा अकेला उसे कभी छोड़ा नही जाता।


चुभन सी होती हैं दिल मे,
जब कोई अपना बेगाना बन जाता हैं यूँही कुछ पल में।


बेमौसम बरसती हैं वो,
बिल्कुल मौसम जैसी ही हैं वो,
कभी आसानी से समझ आती हैं वो,
कभी कभी समझ से परे होजाती हैं वो।


सुनो तुम ऑंखोंमें काजल लगाकर बाहर ना घुमा करो,
लाजवाब लगती हो, और तुम लाजवाब सिर्फ मुझे ही लगा करो।


वो छुपती हैं मुझसे,
इतना भी नही समझती की,
की वो कभी जुदा होती ही नही मेरे दिलसे।


बड़े सख्त हैं दुनिया के तौर तरीके,
प्रेम की मूरत राधाकृष्ण की गाथाएँ सुनाते हैं,
पर प्रेम करने वाले परिंदों के पंख यहां काटे जाते हैं।


चुप रहना तुम्हारी कमजोरी नही हैं,
पर कभी कभी कुछ जगह पर बोलना भी जरूरी होता हैं।


दुनिया मे लोग सारे भूखे ही हैं,
फर्क सिर्फ इतना हैं कि सबकी भूख अलग अलग  हैं।
(जिस्म की, प्यार की, खाने की, पैसोंकी, चाहत की,  जीत ने की)


जिंदगी तूने ये क्या सितम किया हैं,
गम के आगे लोग खुशिया देखना ही भूल चुके हैं।
 

ए हसीं हमपे यूँ हसीं सितम ना कर,
हम तो वैसे भी तेरे हँसी के दीवाने हैं।


हैरत हैं ए जिंदगी मुझे अपनी जिंदगी पर,
मर गया हूँ लगता हैं मुझे, साँसे तो चल रही हैं पर।

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तुम हिने चोट दी,
मरहम भी तुम बन गए,
तुम्हारी दुश्मनी में
मुहोब्बत क्यों महकने लग जाए?


दिलमे शफ़क़त थी तुम्हारे लिए,
तुमने मुहोब्बत समझली।


इश्क़ की चाहत में तुमने,
दोस्ती की बेमतलब सूली चढ़ादी।


तुम्हारे तालिम का तालिब हूँ मैं,
तुम गजल हो मेरी और तेरा गालिब हूँ मैं।


हमारे मेहबूब की मुहोब्बत काफी महदूद है,
हमारे काफिले में हम उनकी जान हैं ,
 हमारे काफिले से बाहर हम उनके लिए अनजान है।


बुलंदी ने कहा मुझे नफरत हैं तुमसे,
हमने कहा अरे मेरी जान हमें मुहोब्बत हैं तुमसे,
उसने कहा नही कभी मुझे पा सकोगे तुम,
आँख खोल के देख मेरी जान मेरी मंजिल आज मेरे पास खड़ी हैं।


बावरा दिल है मेरा तुम्हे खो देने से डरता हैं,
बावर जरूर हैं मुझे अपनी मुहोब्बत पर,
इंसानों पर कहा अब भरोसा होता हैं।


तुमसे एक टकराव ने हमें खुदसे छीना था,
सोचा ढूँढ़गे तुम में खुद को, पर तुम फिर कभी ना लौटी,
तुम तो ना आई पर आज तक खुद में मैं नही लौटा।


शबाहतोंका दौर हैं साहब ,
क्या लड़की, क्या लड़का,
जिसमे हुनर हो,
ये जमाना उसका हैं जनाब।


सुना हैं lockdown का मौसम फिरसे आया हैं,
सुनो तुम भी दिल में ही रहना बाहर मत आना, Corona virus  बाहर ही रुका हैं|


मेरे हक़ में हैं तुझे चाहना,
तू चाहे या ना चाहे ये तेरी मर्जी हैं।
मेरे हक़ में हैं तुझे याद करना,
तू करे या ना करे ये तेरा फैसला हैं।


मेरे तसव्वुर में भी तेरा एक किरदार हैं,
जो तेरा होकर भी सिर्फ मेरा हैं।


मुहोब्बत ?? 
हा करती हूँ मैं तुमसे मुहोब्बत।
कितनी ??
मुहोब्बत तोली नही जाती ना।
कब तक??
कायनात कब खत्म होगी पता हैं ?
जुदाई?
ये हक़ तो मैंने खुदको दिया ही नही।


तुम जब रूठ जाते हो हमसे,
लगता हैं रब रुठ गया हैं जहांसे,
तुम जब मुस्कुराकर कहते हो मुहोब्बत करते हो हमसे,
लगता हैं धड़कने रूठ गयी हैं वक़्त से।


तुम यूँही मुस्कुराते रहना ,
हम यूँही बड़बड़ाते रहेंगे।
तुम यूँही देखते रहना,
हम यूँही रूबरू होते रहेंगे।
तुम यूँही महफ़िल जमाते रहना,
हम यूँही अपनी नुमाईश होते देखेंगे।


तुम मुझे तबाह करदो,
ये तुम्हारे बस की बात नही।
आँधी से टकराओ तुम,
और बरबाद ना हो ,
ऐसी तुम्हारी किस्मत नही।



तुम्हे देखती हूं जब जब मैं,
खो जाती हूँ तब तब मैं,
आईने की मुझे जरूरत क्या हैं,
तुम्हारे आँखों मे देख कर सजती हूँ अब मैं।


ना तू कान्हा हैं, ना मैं राधा हूँ
ना तू रांझा हैं, ना मैं हीर हूँ।
ना तू वीर हैं, ना मैं जारा हूँ। 
फिर भी ,
तू प्रेम हैं, और मैं प्रेम में तल्लीन हूँ।


तुम्हारी आगोश में रहना चाहू मैं हर पल,
तुम्हारी बातोंमें खोना चाहू मैं हर पल,
दुनिया में तू कही भी चाहे चले जा,
 तुझ में ही रहना चाहू मैं जिंदगी का हर पल।


Lockdown तो अब हो रहा हैं,
मैंने तो पहले से तुम्हे दिल मे छुपा रखा हैं,
तुम तो क्या मैं खुद भी तुम्हें बाहर ना जाने दु।


हसरते तुम्हे पानेकी ना होती,
तुम अगर मेरी मुहोब्बत ना होती।
तुम अगर तुम्हारे जैसी ना होती,
यकीन मानो तुम वाकई मेरी मुहोब्बत ना होती।
 

इश्क़ की दुनिया का एक ही उसूल हैं,
या तो बेपनाह , बेहद हो या फिर हो ही ना।


दुनिया की चौखटे काफी ऊँची हैं,
उन्हें लांघ कर तुम मेरे हो पाओ, 
तो हाँ तुम कबूल हो मुझे।

दुनिया मे कटघरे हर जगह हैं,
 उनसे जीत कर तुम मेरे हो पाओ,
तो हाँ तुम कबूल हो मुझे।


मैंने ये कभी नही चाहा कि तुम जिंदगी भर साथ रहो,
मैंने बस इतना ही चाहा है कि जितनी भी उम्र रहे मेरी तुम साथ रहो

तुम्हारी आँखोंमें मैंने एक कशिश देखी हैं,
उनमे जो बसी सूरत हैं, तुमने उसेही कशिश लिखी हैं।


तुम से मिलकर एहसास ये मुझे कैसा हुआ हैं,
मिली तो तुमसे थी पर मिली खुदसे हूँ ऐसा क्यों लगता हैं?



गुजिश्ता पन्नों की ये कहानी हैं,
कुछ फट गए, कुछ जल गए,कुछ की जिंदगी अभी बाकी हैं।


तक़दीर में मेरी तू हैं या नही ये तो बाद कि बात हैं,
मेरे दिल मे तू हैं, ये तेरे किस्मत की बात हैं।


हमारे वफ़ाओंकी तौहीन करने पर वो अड़ा रहा,
और हम उनके बेवफाई को भी मुहोब्बत समझते रहे।


बेरंग सी जिंदगी मेरी,
उसमे रंग भरता वो।
मुरझाई सी जिंदगी मेरी,
उसमे नूर लाता वो।
सुमसान जिंदगी मेरी,
उसमे सोहबत लाता वो।
खामोश सी जिंदगी मेरी,
उसमे शोर करता वो।
सेहमिसी जिंदगी मेरी,
उसमे हिम्मत देता वो।
छोटी सी जिंदगी मेरी,
ताउम्र साथ मेरा देगा वो।


कलम और कागज की यारी पुरानी हैं,
कलम बिखेरती जाती हैं जज्बात,
कागज उन्हें संजीदगी से बटोरे रखता हैं।


वक़्त वक़्त की बात हैं ना ,
कल तक लगता तुम्हारे लिए अहम हैं हम,
अब लगता हैं फ़क़त एक वहम है हम।


तुम्हारी नजाकत भरी बाते,
मुझे काफी उलझा देती हैं।
तुम्हारी मुहोब्बत में चूर नजरें,
मुझे काफी सहमा देती हैं।
तुम्हारी दिलकश अदाएँ,
मुझे तुमसे लिपटी रखती हैं।
तुम्हारी हर शरारत भरी हरकत,
मुझे सिर्फ तुम्हारी बनाए रखती हैं।


चैत के महीने में भी,
वो अपनी मर्जी से बरसता हैं।
मुक्कमल हो ही जाए उनको उनकी मुहोब्बत,
या खुदा तुझे तेरे शहर का वास्ता हैं।


इश्क़ मुक्कमल होने ही वाला था,
की कमबख्त नींद ने धोखा दे दिया।


कमाल की खूबसूरत थी वो,
जुबां से ज्यादा आँखोंसे बोला करती थी।
यूँ तो बतियाने से भी डरती थी वो,
पर प्यार हमसे बेहिसाब किया करती थी।


वक़्त बहुत कम हैं,
थोड़ा वक्त निकाल लिया करो।
वक़्त के अपने रुतबे हैं,
फुरसत का लालच इसे ना दिखाया करो।


आज मैं कैसे अपना दिल फिरसे नही हारता,
वो आँखोंमें कजरा और जुल्फोंको आझाद छोड़ आई थी।


आज आईने को मैंने जलता हुआ देखा,
जबसे तुम्हारे आँखोंमें देखा, मैने खुदको आईने में नही देखा।


न जाने क्या क्या खूबी उन्होंने अपने अंदर छुपाये रखी हैं,
नजरोंसे भी वो हमें छू जाते हैं,इतना मेरा चैन न जाने कहा समिटे रखा हैं।


उसका मेरी और देखना,
मेरा आंखे चुराना,
उसका मुझ पर हसना,
मेरा दिल से खुश होना,
उसका मुझसे मिलना,
मेरा धड़कनों को संभालना,
उसका मुझपे गुस्सा करना,
मेरा दिल मे सेहम जाना,
उसका मुझसे लड़ाई करना,
मेरा दिल में खोने का डर जागना,
उसका मुझसे रूठ जाना,
मेरा उसको मनाना,
उसका मुझसे प्यार करना,
मेरा उसपे दिल हार बैठना....
हा यही तो कहानी है मेरी ओर मेरे हमसफ़र की।


कहा जमींदारोंसे उलझते हो कारीगरों,
जीते जी नही सही,पर मौत के बाद जरूर दो गज जमीन तुम्हारे नाम होगी।


मैं मुसाफिर हूँ,
तुझमे ही सफर करता रहूँ,
यही हैं आरजू मेरी।
मैं मुसाफिर हूँ,
मंजिल तक कभी जा ही ना पाऊं,
यही हैं तमन्ना मेरी।
मैं मुसाफिर हूँ,
तेरी ही राहोंपर भटकता रहूँ,
यही हैं चाहत मेरी।
मैं मुसाफिर हूँ,
तेरी ही पनाहोमे जिंदगी गुजार दू,
यही हैं ख्वाहिश मेरी।


तलब सी होगयी हैं लगता हैं अब मुझे,
तुमने कुछ इसकदर मुझे अपनी बनाया हैं।


मैंने पूछा इश्क़ करते हो? कितना ?
उसने कहा आसमां का विस्तार हैं जितना।
मैंने पूछा इंतजार करलोगे? कैसे ?
उसने कहा चातक जैसे करता हैं इंतजार बारिश का।


प्यार हैं तुमसे मुझे और कोई बंधन नही चाहिए, 
प्यार खुद एक बन्धन हैं, जो बांधता नहीं, बंध जाता हैं।


तसव्वुर तक मुझसे खफा खफा से हैं,
एक वही जरिया था तुमसे मिलने का।


मुहोब्बत का अंजाम इतना हसीन हुआ कि हम शायरी करने लगे,
ये जो अब हम अल्फाजोंमे पिरोते हैं, जी हाँ   दिल- शिगाफी ही हैं।


आज मेरे यार ने मुझे महफ़िल में बुलाया हैं,
लगता हैं नया तरीका ढूंढ लिया हैं हमें चोट पहुँचानेका।


अब ना ही रोक ए वाइज़ मुझे मयख़ाने जाने से,
मुहोब्बत नामका लजीज गुनाह किया हैं मैंने।


कुदरत की हसीन बनावट हैं इश्क़,
खुदा की खूबसूरत इनायत हैं इश्क़,
ना तू उसे जिस्मफिरोशी से तोल,
जिस्म से बहुत दूर हैं इश्क़।


उसके बालोंने तो आज सिमा ही लांघ दी,
मेरे महबूब के गालोंपर जो तिल हैं उसे चूमकर।


इत्तेफाक से उस दिन नजरे टकराई थी,
फिर इत्तेफ़ाक़ से हमारी राहे भी टकराई,
इत्तेफाक ही था समझो,
पर हम सात जन्मोके सफर पर भी टकराए थे इस बार हमेशा के लिए।


मयख़ाने के चक्कर लगाना तो आम बात हैं,
हमारे मेहबूब तो आँखोंसे जाम पिलाते हैं।

पहले उन्हें लोगोंकी हड्डियां तोड़नेका शौक था,
फिर उन्हें मुहोब्बत हुई,
अब वो हमारा दिल नई नई तरकीबोंसे तोड़ते हैं।


चाहतोंका अपना ही अलग अंदाज हैं,
वो अपने हो या ना हो,
उन्हें चाहना, चाहते रहना और सिर्फ उन्हें ही चाहना यही अपना काम हैं।

यूँ बार बार चैन चुराना सही बात नही हैं,
आना हैं तो हकीकत मे आओ, सपनों में आकर मिलना सही नही हैं।


मेरी इंतेहा देखना चाहता हैं तू
तो सुन इन हवाओंमें बेइंतेहा हूँ मैं।
मेरी हिम्मत का हिसाब करना चाहता हैं तू,
तो सुन इन फिजाओमे बेहिसाब हूँ मैं।
मेरी ही पनाहोंमे जीकर मेरी ही रुसवाई जहा में करना चाहता हैं ना तू,
तो सुन इन घटाओमे बेपनाह हूँ मैं।
अब भी मुझसे टकराना चाहता हैं तू,
तो सुन तेरे बस की बात नही हूँ मैं।


गम? वो क्या होता हैं?
उससे तो मेरा वास्ता कभी पड़ा ही नही।
पर एक तुमसे मुहोब्बत क्या हुई,
और तन्हाई से राबता बनता चला गया।

नफरत भी ऐसी जो हदोंको तोड़कर बेहद होजाए,
मुहोब्बत भी ऐसी जो लकीरोंका रुख बदलकर अपनी किस्मत खुद होजाए।


ये जो कुछ पलकी दूरियां हैं ना बस यही बेबस हैं,
वरना ये सारी कायनात भी जानती हैं एक दूजे बिन हम अधूरे हैं।


जुबां से बया तो हम भी बहुत कुछ करना चाहते थे,
पर गुमसुम सी तुम थी, 
बेजुबाँ सी मुहोब्बत थी।


वक़्त की गिरफ्त में हैं वो सारे पल जो हमने साथ गुजारे हैं,
जो कैद थे जमाने के तौर तरीकोंसे उन दो दिलोंको किस्मत ने रिहाई दी हैं।


पहले तो हमने सोचा था तुमसे उम्रों के वादें किये जाए,
फिर एक खयाल आया कि कल किसने देखा हैं?


मुहोब्बतोंके शहर में जाना हुआ तो मेरा एक संदेश ले जाना,
कही किसी गली में कोई एक मुसाफिर अपनी मुहोब्बत सेक रहा होगा उसे मेरा मेहबूब बता जाना।


आज कल की मुहोब्बत का फ़साना......
एक नही तो दूजा सही,
सूरत नही तो पैसा सही,
पैसा नही तो कोई और सही,
मुहोब्बत नही तो कारोबार ही सही।


अजीब सी होगयी हैं जिंदगी मेरी,
तुम्हे सोचने बैठु तो कई घंटे गुजर जाते हैं,
तुम्हे देखने बैठु तो वक़्त का पहिया रुकता ही नही हैं,
तुमसे मिलना चाहू तो कोरोना को इससे दिक्कत हैं,
तुम्हे सुनती रह जाउ तो दुनिया मुझसे रुठ जाती हैं,
तुम्हे जितना चाहती हूँ बैचैनी मेरा पीछा नही छोड़ती हैं,
अजीब सी होगयी हैं जिंदगी मेरी।


मुहोब्बत की कोई कमी नही हैं दुनिया मे,
फर्क तो इंसानियत से होता हैं।


यूँ चौखट पर आके इधर उधर जब वो अपनी नजरे दौड़ाती हैं,
ये खबर मुझ तक आते देर नही लगती की मेरे आनेकी आहट उसे होगयी हैं।


जिंदगी में जिस तरह से तब्दीलियां हो रही हैं,
समझ नही आता वक़्त हमसे खफा हैं या हम वक़्त से।


न वो हमारे हुए ना किसी और के हुए,
ना उन्होंने इज़हार किया नाही उन्होंने इन्कार किया,
कुछ उठ गए थे निशाँ मुहोब्बत के जेहन में,
ना उन्होंने मिटाए ना हमने मिटाना चाहा।


उफ्फ साहब का गुस्सा तो देखो,
हमारी एक मुस्कान और उनका गुस्सा गायब😜


अम्बोह से जानी पहचानी महक आ रही हैं,
कोई जाना पहचाना इत्र मेरे मेहबूब के आने का आगाज कर रहा हैं।


थोड़ा खट्टा हैं,
थोड़ा मीठा हैं,
जैसा भी हैं,
अजीज हैं,
थोड़ा गुस्सेल हैं,
थोड़ा सख्त हैं,
रोतडु भी हैं,
हसता भी हैं,
हँसाता भी हैं,
वो मेरा भाई हैं,
इज्जत करता भी हैं,
इज्जत देता भी हैं,
मेरी ताक़त हैं,
मेरी छोटी सी दुनिया का बड़ा सितारा हैं,
वो जैसा भी हैं,
अपनी बेहन का रखवाला हैं।


जब बातें हदसे ज्यादा बिगड़ जाए तो फिर उन्हें सुलझाने की कोशिश न करना ही बेहतर हैं,
धागा अगर कमजोर हो तो उसे सुलझाकर भी वो बुनने के काम नही आता।


ऊपरवाले से बस इतनी सी इल्तिजा हैं,
आए कैसी भी मुसीबत तेरे बच्चे महफूज रहे।


दुनिया वालोंके लिए होगा वो अदीब,
मेरे लिए तो वो मेरा हबीब हैं ।


लो तुम पर कर्ज रही हमारी वफ़ा,
कभी करना तुम भी किसीसे वफ़ा हमारी तरह,
और फिर भी जाने जाना दुनिया मे बेवफ़ा😎


सब कुछ तो हैं बस सुकून की कमी हैं,
सफर तो जारी हैं बस हमसफ़र की कमी हैं।


एक जुर्म हमने किया तो एक जुर्म तुमने भी किया हैं,
हमने बेइंतेहा मुहोब्बत की तो तुमने मुहोब्बत का इम्तेहान लिया हैं।


कुछ मदहोशी भरा मौसम हैं,
कुछ मदहोश हम तुम भी हो जाते हैं।
कुछ दीवानगी का आलम हैं,
कुछ दीवाने हम तुम भी हो जाते हैं।
कुछ उल्फत के नजारे हैं,
कुछ उल्फ़तें हम तुम भी करते हैं।
कुछ मुहोब्बत का परवान हैं,
कुछ मुहोब्बतोंके कारवां हम तुम बना लेते हैं।


दिल जानता तो है कि वो बदल गए हैं,
पर एक आस ये भी हैं कि फिरसे बदल जाएंगे ।


इश्क़ तबाही हैं तो हम तबाह भी होजाएंगे,
इश्क़ मौत हैं तो तुम्हारी बाहोंमे दम तक हम हसते हसते तोड़ देंगे,
इश्क़ तन्हाई हैं तो हम जिंदगी तुम्हारी यादोंमें तन्हा गुजार लेंगे,
इश्क़ अगर इबादत हैं तो हम जी जान से निभाएंगे,
इश्क़ गर इंतजार हैं तो हम हसते हसते तुम्हारे लिये फना हो जाएंगे।


वक़्त की ही कमी है मेरे पास,
वरना तुम्हें याद करनेके अलावा काम और भी हैं मेरे पास।


माँ ने मेरी हर किरदार क्या खूब निभाया हैं,
पिता, भाई , बहन, दोस्त और न जाने कौन कौन मेरे लिए खुदको बनाया हैं।


मेरी माँ के पास कुछ अविश्वसनीय शक्तियां है,
न जाने हर बार मेरे बिना कुछ कहे हर बात कैसे सुन लेती हैं और समझ भी लेती हैं।


दुसरोंपर कीचड़ उछला तो हमने खूब मजाक उड़ाया,
पर एक दिन जब खुद पर कीचड़ उछला तो दूसरोंको हसते देख खुद पर बहुत रोना आया।


कोई चाह रहा था कि वो भी दुनिया मे मशहूर हो,
फिर क्या था उसे मुहोब्बत हो गयी।


तुम सोचलो,
मेरे माँ-बाबा बड़े सख्त थे,
मैं भी उन्हीके तालीम में पली-बड़ी हूँ,
एक बात जानलो,
तुम्हे अगर मुझसे मुहोब्बत हैं,
तो तुम अपने परिवार और दोस्तोंके सिवा किसी और से मुहोब्बत नही कर सकते।


अब तो सावन राजा ने भी दस्तक देदी,
और हमारा यार हैं की अब तक नही लौटा।


तलब......
सिर्फ तुम्हारी.......।
आदत....
सिर्फ तुम्हारी.......।
नशा.......
सिर्फ तुम्हारा........।
मैं....
सिर्फ तुम्हारी....... ।
जिंदगी.......
वो हम दोनोंकी....।


और फिर कुछ ऐसा हुआ,
ये दिल जिसका हुआ 
वो मेरी तकदीर का हिस्सा ही नही हुआ।


तुमसे वफाई करनेका मुझे बहुत खूब नजराना मिला,
मेरी नींद ने भी मुझसे बेवफाई करके तन्हाइयोंको चुना।


मुहोब्बत भी करते हो,
और होश भी सम्भालना चाहते हो ?


धड़कने भी कमाल करती हैं,
आप नजर ना आए तो बढ़ जाती हैं,
आप नजर आए तो थम सी जाती हैं।


मेरा काम तो बस तुम्हे चाहना हैं,
तुम्हें मेरा होना हैं या नही ये तुम्हारी मर्जी हैं।


ऐसे तो उलझने किसीको रास नही आती,
पर मुझको सिर्फ तुझमे उलझे रहना बहुत पसंद हैं।


आग में जल जाए अगर इंसान तो राख ही मिलती है,
मुहोब्बत में जल जाए इंसान अगर तो जिंदा लाश ही बचती हैं।


एक ही हसीन दर्द हैं,
जो दिल को बहुत रास हैं,
मुहोब्बत की पहचान हैं जानम,
हमें आज भी तुम्हारा इंतजार हैं।


तलब ऐसी की,
तबाह भी होजाए,
मुहोब्बत ऐसी की,
वजूद ही मिट जाए ।


जो बदनाम ना हो,
ऐसी मुहोब्बत कहा मिलती हैं??
रिश्वत का जमाना हैं साहब,
हर चीज मुफ्त में कहा मिलती हैं ??


क्यों बेखबर हो तुम,
हमारी मुहोब्बत तो 
हर शहर के अखबार की
ताजा खबर हैं।


घूमने का बहुत शौक था मुझे,
एक दिन तन्हाइयोंके शहर से गुजरना हुआ,
पता चला तन्हा हर कोई है मुहोब्बत के बदौलत,
कोई इंतजार में हैं कोई बेमतलब बदनाम हुआ ।


मुद्दतोंबाद सुकून का एहसास हुआ हैं,
एक शख्स हैं जिसकी अक्स मुझसे टकराके गुजरी हैं।


उसकी आँखोंमें मैंने वो आग देखी हैं,
उसे रोको मत यारो, आज उसने जितनेकी ठानी है।


आपकी हथेली पर हमने अपना दिल रख दिया हैं,
जो भी हश्र अब इसका होगा जिम्मेदार आपही को होना हैं।

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कहते हैं वक़्त के साथ सब बदल जाता हैं,
पर आज तक ना तुम बदले, ना हम बदले, ना हमारी मुहोब्बत बदली।


सूरज अगर डूबता है तो,
चांद अपना काम बखूबी करता ही हैं,
वक़्त कितना भी बुरा आजाए,
हमें अच्छे कर्म करते ही रहना हैं।


लबोंको मेरे तुम्हारे लबोंकी तलब हैं,
जुबां पर मेरे तेरे ही नाम का बसेरा हैं,
तुझसे मुहोब्बत कुछ इसकदर हुई हैं कि,
तू ही तू मेरे दिल दिमाग पर हावी हैं।


दिल अब मेरे बस में नही हैं,
तुम्हारी सुनता हो तो बताना,
तुम्हे चाहना मेरे हक़ में नही हैं।


तुम्हारी मुहोब्बत में जरूर ही मिलावट होगी,
वरना मेरी रूह तुम्हारी रूह में इस कदर मिल ना गई होती।


काश,
हम तुम्हारे दिल मे अपना आशियाना बना पाते....
काश,
हम तुम्हारी आँखोंमें खुद की तस्वीर बना पाते...
काश,
हम तुम्हारे होठोंकी मुस्कान खुद को बना पाते....
काश,
हम तुम्हे सिर्फ अपना बना पाते।


वक़्त लम्बा हैं,
जख्म गहरे हैं,
जख्म तो भर भी जाते पर ,
साहब,
दिए भी किसी खास ने हैं।


उस रोज हुई तो थी उनसे मुलाकात,
पर जालिम वक़्त हैं कि जल्दी में था।


तुम्ही से मुहोब्बत तुम्ही से नफरत हैं,
रिश्ता कौनसा निभाया जाए दिल आज भी confuse हैं।


तुम ही बताओ तुमसे मुहोब्बत भला मूझे क्यों ना हो,
जो अपने माँ-बाबा से इतना प्यार करता हैं वो मुझसे कितना करेगा ?



ये दिल पर कोई दस्तक दे रहा हैं,
तुम कहा हो देखो तुम्हारी गैरहाजरी में कोई हमपर वार कर रहा हैं।


कुछ पल सुकून की नींद हासिल हो,
कभी तो मुझे तुम्हारे बाँहोंके सहारे नसीब हो।


जब जब तुमने मुझे अनदेखा किया हैं,
मुहोब्बत ने मेरी तब तब चुन चुन के बदला लिया हैं।

उसके बालोंसे मुझे बेहद शिकायते हैं,
वो सिर्फ मेरी हैं उसे छूने का हक़ और किसीको नही हैं।


शायरोंकी महफ़िल में मुहोब्बत की बातें हो रही थी,
और मेरी जान बदनामी के डर से अपना आँचल छुपा बैठी।


मैने एक जुर्म किया हैं,
हां, मैने मुहोब्बत की हैं।


उनके घर वाले भी उन्हें हमारे ही नामसे बुलाते हैं,
सोचो हमें ना भूल पाने के और क्या क्या इंतज़ामात किए गए हैं।


बाद महज इतनी थी,
उन्हें हमसे ज्यादा दुनिया की पड़ी थी।


बातोंमें उनकी अदब थी,
इशारोंमें उनकी अदा थी,
 क्या ही कहने हैं उनके जनाब,
इस नाचीज पर वो फिदा थी।


वक़्त के पास वक़्त नही हैं,
वरना पल दो पल ठहरता जरूर।


चंद पल का साथ ही जरूर,
पर तुम साथ तो चलो।


हमने तो क़िर्तास पर महज आसुओंकी कुछ बूंदे छलकाई थी,
न जाने क्यों लोगोने नादानी में वाहवाही कर दी।


घड़ीभर नजर क्या टकराई,
जन्मभर के लिए हमें उनका बना गई।


हर बात जुबां से बया नही होती,
हर किसीको बयाँ की हुई बाते समझ नही आती,
सबको अपना प्यार मिल जाए सुनने में अच्छा लगता हैं,
खैर हर किसीकी किस्मत तिलिस्म से लिखी नही जाती।


मजहबोंके महबस में हैं,
कई नादाँ परिंदे .....
सितम बेवजह सहे जा रहे हैं
काफी मजबूर परिंदे।


वो जो चाँद पर चंद दाग है ना,
बस उसीकी वजहसे उसको कभी किसीकी नजर नही लगती....
और वो आपके चेहरे पर जो एक तिल हैं ना,
बस उसीकी वजहसे आपके चेहरे से हमारी नजर नही हटती।


वक़्त बेवक़्त आही जाती है,
याद तुम्हारी.....
इतने खाली हो क्या ???


प्यार हो तो सबको जाता हैं,
मसला ये हैं की उस सफर पर दूर तक कौन चलता हैं।


एक बात कहूँ,
मुस्कान पर तो दुनिया मरती हैं,
कोई तुम्हारे आँसू पौंछ पाए तो बताना।


किसको कितनी एहमियत देनी हैं ये तो खुद को तय करना पड़ता हैं,
मौसम पतझड़ का हो तो पत्ते तक पेड़ का घर छोड़ देते हैं।


लाखो के ढेर में पड़ा हुआ,
नदी किनारे का छिपला था,
उसने उठा के पिरोया धागे में,
गले का अनमोल हार बन गया।
#life #love


फ़क़त तुम गले लगालो,
आँसू अपना काम खुद करलेंगे... 
फ़क़त तुम नाम पुकारलो,
पैर हमारे तुम्हारी तरफ मूड ही जाएँगे।


हकीकत से परे आंखे मूंद के,
ख्वाबों में पाल के खुशियां अपनी,
रास्ते के मोड़ पे मिली एक परी,
जिसमे बसी थी दुनिया मेरी।
#life #love


उन्होंने हमें फिजूल समझ के छोड़ा था,
औऱ हमने उन्हें फिजूल बनाके😜


वक़्त की कमी हैं मेरे पास,
इतना खोया रहता हूँ मैं तुम्हारे आस पास।


चोरी करनेकी हद ही हो गईं,
वो आया और मेरा दिल लेके फरार भी होगया।


तुम सितम पर सितम करो,
और मैं उफ्फ तक ना करूँ,
पर तुम अगर मुझे छोड़ने की भी सोचो,
फिर मैं तुम्हारी जान भी लेलु😜


वो जो मुझे चाहिए,
किसीने बताया तेरे पास हैं,
जरा कीमती हैं,
पर तु चाहे तो अपना दिल मेरे नाम कर सकता हैं।


कुछ पल का साथ ही था,
पर ख़ूबसूरत था...
बेशक जुदा हैं अब हम
पर यक़ीन मानो ये होना शायद जरूरी ही था।


अगर जिंदगी से प्यार हैं,
और ज्यादा जीना चाहते हो तो,
कभी किसीसे प्यार मत करना☺️
आगे आपकी मर्जी


मुहोब्बत कभी खत्म नही होती,
अधूरी रह जाये मुहोब्बत तो 
हर बार कोई बेवफा हो ये बात जरूरी नही होती।


हमने सोचा ही नही था कि,
ऐसा भी कभी होगा....
मिलों दूर रहने वाला हमारा हमदम
यू हमारे रूबरू खड़ा होगा।


किसीको कभी कम समझनेकी भूल मत करना,
हर कोई अपने इलाके का बादशाह ही होता हैं।


अब मसला दरअसल ये हैं कि,
उनकी जिंदगी में हम भी एक मसला हैं ।



हाँ हमने तुम्हें समझकर ले लिया,
कुछ दिन तुम्हे हमसे मुहोब्बत थी,
दिल ही तो हैं किसी पर भी आजाता हैं,
अब तुम्हारा ही देखलो किसी और पर कुछ दिनोंके लिए आगया।


राहत के कुछ पल थे हमारी भी जिंदगी में,
फिर एक रोज हमें किसीसे बेइंतेहा मुहोब्बत हो गई।


ए चारागर बस इतनी सी बात बताते जा,
कुछ दिनकी जिंदगी हैं या जिंदगी के कुछ दिन हैं अभी शेष ।


सुनो मैं तुम्हारे दिल मे हमेशा के लिए रहना चाहती हूँ,
अब यू किराए के मकान में और नही रहा जाता।


याद रखना हम तुमसे नाराज हो सकते हैं,
पर खफा नही........


भीगना मुझे बहुत पसंद हैं
फिर चाहे वो तुम्हारी मुहोब्बत हो
या फिर मौसम की बारिश।


दुनिया से परे मेरी अकेली एक दुनिया है,
जिसमे दुनिया भर की सारी खुशियां अपनी दुनिया मे खुश हैं।



एक मशवरा था जो सबको देता हूं,
गर आई है चोट तो जरा खुद संभालना,
बहे लहू घाव से तो बेह जाने देना,
पर उपकार के पांव तले मत दबना।
#life

बारिश भी बड़ी खुफिया हैं,
पर राज तुम्हारे बताने 
वो मुझे मिलने रोज आती हैं।


तुम तुम ना रहे 
हम हम ना रहे
इसकदर हम हमतुम होगए।


अब लिखना तो हम नही चाहते थे,
पर उसे मेरी लिखावट से मुहोब्बत हैं।


दिल की आरजू भी कितनी मासूम हैं,
इसे मुहोब्बत भी उसीसे हैं जो उसके नसीब में नही हैं ।


मुहोब्बत ने मुझे अजीब हालातोंमें उलझा रखा हैं,
तुमसे करली वफ़ाए तो अपने रुठ जाएंगे,
पर डोली मेरी उठ गई तो जनाजा तेरा जाएगा🥺🥺


तुमसे मुहोब्बत बेपनाह हैं,
पर मज़बूरियोंको मुझसे ज्यादा मुहोब्बत हैं।


चारों और अब फिर उल्फ़तें ही होगी,
मुहोब्बत बरसा हैं जनाब,
बहार आना तो जायज हैं।


एक आस ही तो हैं,
जो जिंदा रख सकती हैं,
या मौत से मिलवा सकती हैं...


कुछ दिनोंकी घुटन ने हमें क्या से क्या बना दिया,
कल तक किसी और पर निर्भर थे आज आत्मनिर्भर बना दिया😜


आफ़ाक़ के पसारे में से एक दिलचस्ब इंसान हमारे रूबरू हुआ था,
क्या नाम था याद नही पर खुद को मेरा मेहबूब बतला ता था।


गली बदली, गाँव बदला, शहर बदला, मुल्क बदला,
पर दुनिया का कोई बाजीगर मुहोब्बत नही बदल पाया।


दर्द भी बेदर्दी ने ऐसा दिया हैं कि
बया भी नही किया जाता,
अश्कोंके जरिए बह भी नही जाता।


वो खामोश रहती हैं,
पर नजरोंमें उसकी शोर बहुत हैं।
दिल मे उतरके देखो जरा उसके,
बुझी बुझी सी वो लड़की किसीसे मुहोब्बत बेपनाह करती हैं।


महसूस किया जाने वाला इश्क़
छुये जाने वाले इश्क़ से ज्यादा असरदार होता हैं।


उफ्फ, ये उसका बतियाते बतियाते  लफ़्जोंसे छेड जाना,
किसी इश्क़ से कम तो नही हैं।


उसके लब शिकायते करने में व्यस्त थे,
और हमारे लबोंको शरारते सूझ रही थी।


जिसकी वजहसे उसका दिल बेचैन रहता हैं,
वो पागल उसीको सुकुन कहता हैं।


वो इतने करीब आकर दूर होगया,
पता ही नही चला,
ये उसकी साजिशें थी,
या हमारे रिश्ते में ही रंजिशें थी।


दर्द को अगर दर्द समझ कर सहा जाए,
तो दर्द बेहद दर्द देता हैं।
दर्द को अगर दवा समझा जाए,
तो दर्द गहरे से गहरा घाव भी भर देता हैं।


उनके दिल तक पहुँचनेका कोई नक्शा होतो बताइयेगा,
लगता हैं राह भटक गया हूँ।


इस जमाने में इश्क़ का फितूर नही ,
जिस्म का सुरूर ही शेष हैं।
जो सच्ची मुहहोबत पहले हुआ करती थी,
अब वो किताबोंमेही कैद हैं।
अगर दिख जाये दुनिया की किसी छोर पर आशिक़ी सच्ची,
दुनिया के नजर में वो हर आशिक़ पागल हैं।
जिस्म से नही रूह से भी मुहोब्बत करते हैं लोग,
पर ऐसी मुहोब्बत खुदा कसम किसी कोहीनुर हिरेसे कम नही होती हैं।


हैवान क्या होता है क्या कभी देखा हैं,
वो लाचार पड़ी हुई रुह,
देखती हैं अपने जिस्म को नोचते हुए,
बताओ क्या कभी ऐसा मंजर देखा हैं?


He iss jahan me log jism ke bhuke... 
Yaha kon rooh se pyar karta he... 
Bhari he insaano me hawas ki lalas... 
pyar ko jism ne gulam bana ke rakha he..

Hawas jism ki har kisi me palti he,
Fitarat insaan ki rooh ko 6une ki honi chahiye,
Bhukh to sab mita sakte he,
Pyaas honi chahiye do rooh ko ek jagah jode rakhne ki.

मुहोब्बत की थी ना,
अंजाम तो यही होना था।
सच्चे और मासूम से इश्क़ ने
शातिर दुनिया के सामने दम तोड़ना ही था।
जो डूब चुके हैं इश्क़ की गहराई में
उनका कातिल उनके अपनोंकोहि होना था।
बेपरवाह सा इश्क़ जो इस तरह सरे बाजार में लुटा गया,
ऐसा मंजर देख खुदा का रोना भी जायज ही था।


इश्क़, मुहोब्बत, प्यार , प्रेम 
ये सब हमारे पल्ले नही पड़ते हैं।
जिसे हम सिर्फ कह भी दे अपना
उस पर अपनी जान वार देते है।


उनकी हर बात में तुम्हारा जिक्र हो या ना हो,
पर जब भी जिक्र हो तुम्हारा तब फिक्र हो उसमे तुम्हारी,
तो समझ लेना मुक्कमल इश्क़ की मंजिल नजदीक ही हैं।


नजरोंसे कत्ल करना तो अब आम बात हैं,
मेरा यार तो अपनी बातोंसे मेरा कत्ल सरेआम करता हैं।


मेरे महबूब के शौक भी अजीब हैं,
लड़ना उन्हें अजीज हैं,
तभी तो हर बार हमहीसे नजरे लड़ाते हैं🙈।


जिंदगी कभी सरल नही होती,
उलझनोंसे भरी होती हैं,
उलझन शब्द को ही लेलो,
इसमे तक उलझनोंकी कमी  नही होती।


काफी नजाकत से पेश आते थे हम उनसे,
शायद यही वजह थी उनकी हमसे रुकसत होंने की।


सुबह हो गई मामू..
अब बाहर घूम के आओ रे.. 
थोडी महन्त करने पे लगों.. 
और ये शरीर 💯 साल के लिए बनाओ रे.. ❤️


Har koi yaha jism ka bhuka nhi hota he..
Kuch log  jism ko bhi mohobbat  ke aghe jhuka dete he... 
Fitrat nahi mohabbat ho toh rooh se hi honi chahiye... 
Bhuk aur pyaas ki baat jism ke liye hota he...
Pyaar ho toh mehsoos hona chahiye...


Jism ki baat ku karne tum lage ho..
Kya y baat itni badi ho gayi h ki sare mahulle m aisi baat karne lage ho..
Pyar ho toh y baat aati hi nahi..
Aur maja karna ho toh y baat jati hi nahi..
Thodha shant hou aur soch lo jism bhi..
Paar ijat karna sikho.. 
Jism ki koi baat kabhi aaye hi nahi❤️


मुहोब्बत के डागोंने अगर नवाज ही दी हैं जिंदगी,
तो क्यों ना हम भी कहे,
डाग लगनेसे ऐसा होता हैं तो 
"डाग अच्छे हैं।"


मेरी अक्स भी मुझ से अब खफा रहती हैं,
इंसानोंसे क्या उम्मीद रखु अंधरोंमें अक्स तक साथ नही देती हैं।


सोचने में ज्यादा वक़्त ना जाया करे वक़्त गुजर जाएगा,
फिर तुम सिर्फ कहते रह जाओगे की अपना भी टाइम आएगा ।


जमानेभर की परवाह करने चल पड़ा हैं तू,
पर क्या जिसका तू ही जमाना हैं उसकी परवाह करना भूल गया हैं तू?


सुना हैं मुहोब्बत की दुनिया का उसूल हैं,
अगर दुनियाभर में रुसवाई भी क्यों ना होजाए,
गम ना कर वो भी पूरी वसूल हैं।


दुनिया भर की ठोकरे खाकर भले ही लहूलुहान होगया है बदन मेरा,
पर किसी भी तूफान का रुख बदल सकू ऐसा होगया हैं चट्टान मन मेरा।


नसीहते हमने भी खूब पाई थी,
मुहोब्बत के सफर से बगावत करनेकी नसीहते हमने भी खूब पाई थी,
पर नसीहते थी ना,
हमने नजरअंदाज करनीही ठीक समझी थी।


बेफिक्र सा मै अब गुम हो गया हूँ,
मुहोब्बत में तेरी गुमनाम हो गया हूँ,
दुनिया भर से अपना ठिकाना मिटा आया हूँ,
दिल टटोलकर देखो तुम्हारे दिल मे अपना आशियाना बनाये बैठा हूँ।


मुझमे वो कुछ इस तरह शामिल हैं,
जैसे वो मेरा मुझमे ही रहे ये खुदा की ही कोई साजिश हैं।


क्या पूछा, की तुम्हारा इंतजार क्यों हैं?
'तुम मेरे हो' क्या ये वजह काफी नही हैं?


आप से तुम
तुम से हम
और फिर
हम से तुम
तुम से आप
ये सफर इंसान की जिंदगी को उलझाकर रख देता हैं।


थोड़ा तो ख़ौफ़ खाओ दुनिया वालो,
कलम हूँ मैं,
किसीकी जिंदगी सवारनेवाली मैं अगर बग़ावत पे उतर आयी तो,
जिंदगियाँ तबाह हो जाएगी।


इश्क़ को इबादत कहने वाला ये जहाँ,
इश्क़ करने वालोंको जिंदा जला देता हैं।


गलतफहमियाँ हर रिश्ते को कमजोर बना देती हैं,
मुझे भी थी गलतफहमी की,
उनकी इकलौती मुहोब्बत हूँ मैं।


इश्क़ करने वाला हर इंसान रोता हैं,
जिसने पालिया वो खुशी के आँसू रोता है,
जिसने खोदिया वो दुःख के आँसू बहाता हैं।


मुहोब्बत के सफर में चलते कई मुसाफ़िरोंको हमने देखा हैं,
वफाई के बड़े बड़े पाठ पढ़ाने वाले बेफाओंको भी हमने देखा हैं।


हम शायरा हैं,
सूरत से ज्यादा नियत पर गौर फरमाते हैं,
जिस्मकी खूबसूरती तो चार दिनोंकी हैं,
रूह की खूबसूरती ताउम्र जवान रहती हैं।


Vo phli najar vo chera tumhara..
Jaab aankho se tha tumko dil m utara..
Rimjhim se pani m tha tumhara ghar apna sahara..
Jholi m sir rake so jana tha basera hmara.. 😍😍😛❤️


तुम प्यार समझनेकी बात करते हो,
वो तो मेरे लफ्ज तक नही समझ पाए।


दर्द लफ़्जोंमे बयाँ नही होता,
शायरियां इन्हें सजा नही सकती,
दर्द महसूस किया जाता हैं,
और हर रूह इस काबिल नही होती।


सितारोंकी महफ़िल में,
एक चाँद की कमी हैं।
दोस्तो कैसे नुमाइश करू मैं उसकी
जालिम आज रात अमावस की हैं।


Hath pakad sath chalna hi hmne sikha h..
Chor jane k toh hunar samne valo ne sikha h..
Khush hone k hunar khud se sikha h..
Bss dukh paar karne k hunar tujhse thodha sikha h..
Akele rhke bhi sath rhna usse sikha h..
Gum m bhi khushi dikhana apni maa se sikha h..
Haar chij ko sahi btana apni imandari se sikha h..
Haar kisi ko sahi rasta dikhana pyar karne valo se sikha h..
Dukh ho y sukh eek jaisa bartav dikhana apne bhole se sikha h..
Thodha sidha thodha natkhat ban jana apne nand lala se sikha h..
Pyar aur bhakti m tut jana budh meera bai se sikha h.
Haar dum tera sath nibhana dil ki achai se sikha h..
Bss khushi lau hmesha tere chere pe yahi maine jamane se sikha h..
Dukh ki ach na aaye tujhpe koi y apne pyar k liye sikha h..
Aab itna kuch sikhne sikhane k baad..
Subha ko suraj jaise dubara chamakna bhi hmne sadhguru se sikha h..
Aur raat ki andhar m bhi khada ho jana himat se sikha h.. ❤️


वो कह रहे थे हमसे की 
"मैं होश-ओ-हवस में ये ऐलान करता हूँ कि मुझे तुमसे प्यार हैं"


हमने भी कहदिया
"क्या कहा, मुहोब्बत हो गयी हैं,
और फिर भी आप होश में हैं??"


हम सिर्फ तुम्हे बताएंगे हमारी मुहोब्बत की  गहराई,
पूरे दुनिया को नही।
क्योंकि हम तुमसे मुहोब्बत करते हैं,
पूरी दुनिया से नही।


कहने वाले कहते होंगे अपनी मुहोब्बत को दुनिया,
पर मुहोब्बत हमारे लिए दुनिया दिखानेवालोंसे बढ़कर नही ।


अरे शराब तक जलती हैं हमसे
कम्बख़्त जबसे हम मिले हैं
मेहबूब ने हमारे
जामसे तालुक्कात सारे तोड़ दिए हैं।


कहनेको तो आलीशान घर है मेरे पास,
पर मुझे आपके दिल में रहना ही महफूज लगता हैं।


मेरे दिल की पसंद पर मुझे नाज हैं,
पर मेरे दिलकी पसंद मेरे नसीब को पसंद नही हैं😔।


तसव्वुर में मेरे शोर मचाने वाला वो शक़्स
अस्सल जिंदगी में कमाल का गुमसुम रहता हैं।


जश्न में आतिशबाजी तुम खूब करते हो
पर क्या कितने परिंदोंको के घर इस आतिश के लपटोंमे खाक होगये ये हिसाब रखते हो?


दीदार-ए-सनम की चाह में आँखें खुश्क हुई,
दीदार-ए-सनम होते ही वे नम होगई ।
मुलाकात की राह में सिकुड़ गई थी जो रूह,
उनके रूबरू होकर उनसे लिपटते ही बहर गई।


दर-ब-दर भटक रहा हूँ मैं  फकीर बनकर,
वाकई तेरी मुहोब्बत ने मुझे मालामाल करदिया ।


इश्क़ का नशा हर नशे पर भारी पड़ता हैं,
जालिम एक बार चढ़ जाए तो उतारनेका नाम ही नही लेता हैं।


लबों पर जिक्र भी आपहीका हैं,
इनको तलब भी आपहिके लबोंकी हैं।



मैने कई खुश्क आँखोंमें उमड़ते बवंडर देखे हैं,
मैने कई नम आँखों मे ठहरती खामोशी भी देखी हैं,
एक ही इंसान के चेहरेपे मैने कई बदलते चेहरे भी देखे हैं,
ए जिंदगी, ले, चल मान लिया मैंने तुझे 
जिंदगी जीने के फन मैंने तुझीमे पनपते देखे हैं।


इश्क़ ने दी थी दस्तक हमारे भी दरवाजे पर,
हमनेही नही खोला दरवाजा ये सोच कर की कही बट ना जाएं मुहोब्बत माँ-बाप के अलावा कही और।


उन्होंने मेरी आँखों मे कई ख्वाब झूलते देखे हैं,
अफसोस, उन्होंने मेरी ख़्वाबोंमे खुदहीको बसा नही देखा हैं।


इस दुनिया के लिए महज एक कागज का टुकड़ा हूँ मै,
पर जो मेरी दुनिया हैं उसके लिए पूरी की पूरी किताब हूँ मैं ।


बेशक किसी महफ़िल में रंगत भरदो वो सितारा नही हो तुम,
मगर किसी की अंधेरी जिंदगी में थोडासा उजाला भरदो वो चाँद जरूर हो तुम।


किसी से सात फेरे लेने से दो दिल नही जुड़ते हैं,
साथ ना होने से दिलोंके रिश्ते  टूट नही जाते है।


ए खुदा, तेरे दरबार मे मुझे थोडासा तिलिस्म मिलेगा क्या?
मैं बदल डालू मेरी किस्मत उससे, फिर मुझे मेरा इश्क़ मुक्कमल होगा क्या?


इतनोंके बीच होकर भी मैं इसकदर तन्हा क्यों हूँ?
मेरी उलझी हुई जिंदगी की गुन्हेगार मैं खुद ही क्यों हूँ?
अपनी जिंदगी को बिखरती देख कर भी कुछ ना कर सकूं मैं इतनी लाचार क्यों हूँ?
सबकुछ खोते हुए देख कर भी उन्हें पाना ना चाहूँ मैं इतनी लापरवाह क्यों हूँ?
जिंदगी से इसकदर हार कर भी मैं आज जिंदा क्यों हूँ?
दुनिया जिसे बाजीगर कहती हैं वो मैं खुदहीसे हारी हुई क्यो हूँ?


कुछ पल के लिए हुआ था नसीब मुझे उससे तकल्लुम
इत्र सा छाया था वो , फिर न जाने इन हवाओंमें कहा होगया वो गुम।

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एक मासूम सी मुस्कान 
ना जाने कितनोंकी कातिल होगी,
क्यों ना हो फक्र मुझे खुद पर
जब वो इतनोंकी कातिल
फ़क़त मेरी दीवानी होगी।


रहनुमा सा वो मुझे ऐसी राह दिखाता चला गया,
मंजिल उसकी मुहोब्बत का शहर था, पर मैं अंधा बनकर उसी राहपर चलता चला गया।


जब आ ही गए हो तो ,
बैठो थोड़ा फुरसत से।
जब नैन मिल ही गए हैं तो,
इन्हें बातचीत ही करलेने दो तस्सली से।


वो दिलजला आशिक़ हैं साहब
इनके आँखोंमें अश्क़ोंके सागर हैं,
और हाथ मे  साग़र है,
फर्क बस इतना हैं,
ऑंखोंका सागर भरा हुआ हैं,
और हाथ का साग़र खाली हैं।


रफ़ीक के सोहबत की बहार हैं,
उन बिन तोह जिंदगी का एक दिन भी खिजाँ हैं।


उस फ़कीर ने मुझको क्या राज की बात बताई,
जिंदगी-ओ-रफ़ीक की अलबेली यारी की दास्ताँ सुनाई।


उसे इश्क़ कहो या तिलिस्म कहलो कोई,
जिसने भी चख लिया काबू खुद पर रख पाया ना कोई।


ना जाने कब मैने ये हुनर सीख लिया,
जिस्मानी भेड़ियोंके बीच मैंने एक रूहानी मेहबूब ढूंढ लिया।


इश्क़ इबादत तब बनता हैं,
जब वो हमारे नही हैं जानते हुए भी
हम उनसे मुहोब्बत बेहिसाब करते हैं।


जिस रोज मुहोब्बत लफ़्जोंमे बया ना हो पाए,
शायर शायरी में उसे सजा ना पाए,
गजलगो गजल में उसे उतार ना पाए,
उस रोज समझलेना इबादत के बहुत करीब है वो मुहोब्बत।


इश्क किया हैं ना, थोड़ा सब्र रख
तू तबाह भी होगा, आबाद भी होगा।

दर्द से भी  ऐसे बतलाते हैं हम
कोई पूछे हाल बस मुस्कुरादेते हैं हम।


ख्वाब कब इम्तहान बन जाए..
पता यही ना लग पाए..
आप जिंदगी बन्ना चाहे..
और वो हाथ भी पीछे हटा जाए..
साथ रहने के वादे कर..
पता नहीं कब अकेला तुम्हें बीच रहा छोर जाए.. 
अपने को खड़ा करना सीख जाओ.. 
कोई सहारा देने तुम्हें इस जिंदगी ना आए.. ❣


मुहोब्बत के शहर में कोमल दिल लेके मुहोब्बत बटोरने आते हैं लोग,
दिल टूटता हैं बेचारोंका, फिर मुहोब्बत के जिक्र से भी खौफ खाते है लोग।


Hmm toh dub k bhi nadi m dubara kud jate h..
Bss koi dubane vala ho hmm toh saas rokna sikh jate h.. ❣️

दिल से दिल जोड़ना तो आसान बात हैं,
तुम मेरा टूटा हुआ दिल समेट पाओ तो जानू मैं।


पतझड़ के मौसम में अनजानीसी बहार आई हैं,
बंजर से मेरे दिल मे मुहोब्बत के पौधे ने अपनी जगह बनाली हैं।


हररोज तुमसे तुम तक का सफर तय करती हूँ मैं,
तुम्हारी भी यादों में मेरा जिक्र होता होगा यही खुदको समझाती हूँ मैं,
तुमने देखा था जाते वक्त मुझे मुड़ कर इसी बात की दिलको तस्सली दिलाती हूँ मैं,
सालों बीत गए हैं,
पर तुम एक दिन लौट आओगे बस इसी उम्मीद में जिंदगी काट रही हूँ मैं।


माना की धोका तो गजब देते हो तुम,
पर ये भी सच है कि,
बात लाख पते की करते हो तुम।


जिसका मेहबूब ही इतना नशीला हो,
उसे मयखाने चक्कर लगानेकी क्या जरूरत?
जब इश्क़ का खुमार इसकदर चढ़ा हो,
इस नशे के आगे मय की क्या औकात?


मुझे तमीज सिखाने आज दुनिया चल पड़ी हैं,
वाह रे दुनिया, क्या तू खुदके गिरेबान में झाँकना भूल चुकी हैं?


मेरे वफ़ा-ए-इश्क़ की तौहीन उसने भरे बाजार में की,
ना मुकदमा चला और नाही सुनवाई हुई,
पर मुहोब्बत के ठेकेदारोंने कारवाई भी मेरे खिलाफ क्या खूब की
कमजोर थी मुहोब्बत मेरी,
दुनियादारी के सामने टीक नही पाई,
देखते ही देखते मेरी मुहोब्बत सूली चढ़ गई।


इश्क़ के सियासत में मुहोब्बत के विरासत की जंग हर रोज जारी हैं,
और तुम्हे लगता हैं कि तुम्हारा जिक्र मेरी बातोंमें ना होनेसे मुझमे इश्क़ बाकी नही हैं?


तौबा,
उनका यू हमें मुस्कुराकर देखना,
बिना कोई हथियार उठाये हमारा कत्ल कर जाना,
ऊपर से हमसे ही हमारे दीवानगी की वजह पूछना,
कमाल करते हैं आप भी।


दिमाग ने अपना काम बहुत ही ईमानदारी से किया था,
जब जब मंजिल से भटक गया था मैं मुझे सही रास्ता दिखाया था,
वो तो दिल ही बेईमानी पर उतर आया जो इश्क़ की राहोंपर चल पड़ा था।
जब खाई ठोकर उसने तब दिमाग पर उसका भरोसा हुआ था।


इश्क़ की ही वजहसे जिंदगी में तब्दीलियां हुई हैं,
चोट देने वाले ने ही मुदावा का काम किया हैं,
बदल रही है तारीखे अपनी रफ्तार से,
पर उनसे जो राबता है उसके इख़्तिताम की तारीख खुदा ने बनाई ही नही हैं।


उनकी नजरोंकी गिरफ्त में हमने खुद को महफूज पाया हैं,
उनकी हर हरकत में हमने उन्हें हसीन ही पाया हैं,
यू तो बंदिशें नही आती रास हमें,
पर हमने उनकी बंदीशोंको अपनी जिंदगी पाया हैं।


कुछ तुम्हारी बाहोंमे बीत गई,
कुछ तुम्हारी यादोंमें बीत गईं,
तुम में ही सिमटी थी जिंदगी मेरी,
तुम में ही बीत गई।


आज जब तसल्ली से सोचा तुम्हे मैंने,
समझ आया आज तक तुम्हारे अलावा कुछ सोचा ही नही मैंने।


नजरोंसे हमें छू जाना उनकी पूरानी आदत हैं,
पलभर में मौसम में मदहोशी ही मदहोशी छा जाती हैं।


बड़ी अल्लहड़ सी लड़की हुआ करती थी वो,
फिर एक दिन मुहोब्बत कर बैठी।
बहुत खोई खोई सी रहने लगी थी वो,
ये कैसी गुस्ताखी वो कर बैठी।


उधर वो वतन की मिट्टी में मिल गया था,
इधर ये अखाड़े में नए शेर तैयार करने में लगी थी।


वो पगली अभी भी अपने आप को आईने में निहारती रहती हैं,
ना जाने कब मेरी ऑंखे पढ़ेगी उसकी खूबसूरती मेरे आँखोंमें उतरती जा रही हैं।


बेशुमार ही थी,
मुझे तुमसे नफरत 
और तुम्हें मुझसे मुहोब्बत।


राजा जीत ता जरूर हैं,
अगर वजीर अपनी चाल सही चल जाए।
वक़्त बदल जरूर जाता हैं,
अगर बादशाह अपना वजीर सही चुने जाए।


दिलोंके दरमियाँ😍❤️:
वो जाना चाहते थे,
 हमने रोक लिया।
सोचा, मेहबूब हैं,
परीक्षाएँ तो खूब लेंगे।


उसका सजदा करनेको दिल बेकरार हैं,
पर उनसे क्या शिकवा करू, वही तो मेरे यार हैं।


जिन रिश्तोंका कोई नाम ना हो,
उन्हें निभानेका मजा ही अलग हैं।


Hey Darling,
Come and hold me tight
I'm dying to feel you

इतनी भीड़भाड़ भरी जिंदगी में,
न जाने क्यों तू मेरे दिल को भागया।
ये कमाल जरूर तेरी सादगी का होगा,
जो तू मेरे खामोश दिल को रास आगया।


शराबी आँखोंमें उनकी अजीबसा नूर हैं,
बस यही मेरे दिल के कातिल की पहचान हैं।


हाल-ए-दिल मेरा जरा रंगीन हैं,
मेरा यार वाकई बहुत अतरंगी हैं।

मुझे जरूरत नही हैं किसी को कुछ समझानेकी
गुरुर हूँ मैं अपने माँ-बाप का क्या ये काफी नही हैं?


हर इंसान की कोई खूबी हैं,
जैसे उनकी थी यादे दे कर भूल जानेकी।


कश्मकश भरी जिंदगी में यही होना बाकी था,
मुहोब्बत का एक ही झोका जिंदगी तबाह करने के लिए काफी था।


अंजाम की फिक्र में रहते रहते लोग,
जुल्म की गिरफ्त में कैद होने लगे हैं।


पैरोंमें उसकी छनकनेवाली पायल
हमारी मुहोब्बत का शोर हैं।


अपनोंसे हार गए हैं,
वरना हम आज भी दिलोंके बाजीगर है।


मुहोब्बत वाकई जालिम हैं साहब,
वरना कोई किसी अनजान के लिए जान थोड़ी ना गँवाता।


आहिस्ता चलने वाले कदमोंकी रफ्तार भी तेज हो जाती हैं
जब मंजिल के आस पास होनेका अंदाजा इन्हें हो जाता है।


जिस रोज मुहोब्बत लफ़्जोंमे बया ना हो पाए,
शायर शायरी में उसे सजा ना पाए,
गजलगो गजल में उसे उतार ना पाए,
उस रोज समझलेना इबादत के बहुत करीब है वो मुहोब्बत।


ख़्वाबोंमे जो मेरे दिलके करीब ऐंठा हैं,
हकीकत में वो मिलों दूर जाके बैठा हैं।


हकीकत का खौफ इतना भयानक हैं कि,
लोग ख़्वाबोंकि दुनिया को ही हकीकत समझ बैठते हैं।


जिन्होंने अपनी जवानी मुझ पर वार दी,
कर्जदार हूँ मैं उनका,
इस बुढ़ापे में अब उनके,
 जिंदगी मेरी उन्हीके नाम हैं।


उनके नजरअंदाज करने का अंदाज आज भी नही बदला हैं,
और जमाना अफवाह फैला रहा हैं कि वो बदल गए हैं।


हम दिल्लगी क्या कर बैठे, 
दिल अब कही लगता ही नही।


नफरत अगर इतनी शिद्दत भरी हैं तो,
सोचो मुहोब्बत कितनी जुनून भरी रही होगी।


कमाल की बात हैं ना,
जो जिसके जितने करीब हैं,
वो उससे उतना ही दूर हैं।


यारो, गौर फरमाना
की फ़क़ीर हूँ मैं उनकी आशिकी का,
के फकीर हूँ मैं उनकी आशिकी का,
पर वो झोली में मुहोब्बत तो डाले।


जिन दोस्तोंको हमने आईना समझा था,
बस वो ही हमें आईना दिखाकर चले गए।


जिन्हे अपना समझा वहीं अपना बिना समझे चले गए..
गैर तो थे ही पराए अपने भी पराए बन चले गए।


खामोश सी उसकी नजर,
मुझसे मिलते ही शोर मचाने लगती हैं।

तुम ही हो जान मेरी
तुम ही हो खुदा
तुम्हें देखे बिना
ना लगता है ये जिया


ठंड में भी गर्मी का एहसास दिलाती है,
मौसम बदलने के लिए उसका खयाल ही काफी है।


शुक्रगुजार हूँ मैं जिंदगी की,
जो हररोज मुझ जीने के नायाब हुनर सिखलाती हैं।


कयामत से मुलाकात मेरी हररोज होती हैं,
वो आँखोंमें कजरा डालना कभी नही भूलती हैं।


मदहोशी का जाम लिए जब वो मेरे सामने ठहरती हैं,
आँखोंसे चलता उसकी एक एक तीर उसे मुझमे उतारता चला जाता हैं।


उसका यूँ नजरे उठा कर मुझे देखना , मुझे कटघरे में खड़ा कर देता हैं
दिल वो मेरा ठग लेता हैं, और चोरी का इल्जाम मुझ पर लग जाता हैं।


साँसे ही गर उतर आई बगावत पर , 
तो भला दिलका क्या कुसूर?


तुमने समझ लिया मुझे गर बेवफा,
तो भला इसमे प्यार का क्या कुसूर?


प्यार भी करो और इंसाफ भी मिले,
कैसी बात कर रहे हो?


जनाब ये वो दुनिया हैं, 
जहा इंतजार की कई सदिया गुजर जाती हैं,
पर मुलाकात एक पल के लिए भी मुक्कमल नही होती।


लाजमी हैं तुम्हारा यूँ पैसोंपर इतराना ,
जरूर तुमने किसीको दर्द बेच कर अपने लिए खुशियाँ खरीदी होगी।


तन्हाई में मैं मेरी इतनी मशगूल हूँ कि,
मेरी दुनिया मे सिर्फ एक मैं ही मशहूर हूँ।


हाँ , मुझे बचपने में जीना पसंद हैं,
क्योंकि माँ के आँचल में छुप जाना मुझे अच्छा लगता हैं।



मेरे जज्बात कुछ उलझे हुए हैं,
लफ़्जोंमे पिरोये तो जाते हैं,
 पर कलम से उतर नही पाते।

जो वक़्त बीत गया हैं उसे गुजर गया समझके दफना दो,
जो गम तुम्हें आग के लपटोंकी भाँति जला गया उसे बुझा दो,
नया साल आ रहा हैं,
नई परिक्षाओंकेलिये खुद को फौलाद बनादो,
चाहे जीत हो या हार बस तुम परस्थिति से दो हाथ करनेका मन बनालो।


इश्क़ की तपिश में दिल को सेक लेने दो,
कल का तो पता नही पर आज तुम्हे अपनी आँखोंमें भर लेने दो।


सफर भी वही, हमसफ़र भी वही
फिर भी मंजिले अलग क्यों हैं?

अगर वो हर पल मेरे साथ हैं,
तो फिर भी मुझमे ये तन्हाई क्यों हैं?


वक़्त भी कितने जालिम सितम ढाए जारहा हैं,
प्यार तो बेशुमार हैं, पर वक़्त नसीब नही हैं।

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हुस्न ए दीदार की ख्वाहिश रखने वाला वो,
भूल गया था कि उल्फत के हिस्से हुस्न नही आता।


मुलाक़ात को हक़ीक़त हम बनालेंगे,
तुम ख़्वाबोंकि दुनिया से बाहर तो निकलो।


तमाम खुशियाँ उदासियोंमे तबदील हो जाती हैं,
जब मेरे महबूब की मूरत मेरे आँखोंसे ओझल होने लगती हैं।


धुंधला धुंधला सा वो ख्याब अब मुझे खुली आँखोंसे भी दिखने लगा हैं,
मानो जैसे मेहबूब ने मेरे मेरी शहर में दस्तक देदी हो।

सूरत पर मरने वाले लोग,
काश सीरत टटोलना सिख पाते।

इस जिंदगी के तुम जहांगीर हो,
तुम ही अपनी सल्तनत को बढ़ा या सीमित कर सकते हो,
अपने दरबार के हिरे तुम्हे अपनी ही सोच बुझ से चुन ने हैं
याद रखना जिंदगी का कारोबार सिर्फ और सिर्फ तुम चला सकते हो,
बाकी सब तो मायाजाल हैं।


लगता हैं इन हवाओं में रुसवाई मिल गयी हैं,
तन्हाई मेरी किस्मत में लिख दी गयी हैं,
पहले यकीन हुआ करता था,
अब दिल को तस्सली देनी पड़ती हैं कि तुम मेरे हो।


उनकी मौजुदगी इतनी असरदार हैं की,
दुनिया की हर साजिशें बिल्कुल बेअसर हैं।


नजरे मिलते हैं ही हलकासा मुस्कुरा देना 
बस यही काफी हैं मेरे कत्ल के लिए ।

हर जंग में जीत जाने वाला इंसान 
आज तक मौत से नही जीत पाया हैं।
मौत ही किनारा हैं पता होने के बावजूद भी वो जिंदगी के सागर से मोह कम नही कर पाया हैं।

हमारे बेइंतेहा मुहोब्बत के इम्तिहान तुम चाहे जितने लेलो,
हम कल भी बाजीगर थे हम आज भी बाजीगर हैं।


ये इश्क़ की मगरुरिया हमें ना दिखाइए,
हम तो जिनके होते हैं उन्हीमे में  मशगूल होते हैं।


जन्म अंत और मृत्यु प्रारंभ हैं,
यही पहेली आजतक अनसुलझी हैं।


हम टूटे तो भी बिना रूठे..
चाहे तुम्हें चाहे सब से हाथ छठे..
हर बार दर्द में होके भी पकडा तेरा हाथ..
पर तुम तो हाथ छोड़ते छोड़ते..
दिल पे ही हथोड़ा मार बेठे.. ❤️


Ijat se jada kisi ko jhilta ni.. 
Tumhe iss duniya m koi.. 
Tumhare ilava koi samhajta ni ❤️


Unki aadat thi sabse 
mohabbat krne ki 🤞
Sabki parwah krne ki,
Dil lagane ki💕..
Aur hum khudko 
Bewajah Khush Naseeb 
Samajhne lage😁❤️


उसको जरासी हरकत करने की देरी हैं,
फिर मेरे इश्क मे बरकत ही बरकत है ।


Harkat ki ek lehja hota he... 
Tujhe barikne ka ek moka jo mila he.. 
Thoda sa intaha liya jayega, fir apko samjha jayega...
Sabar karo pyar hona hoga toh apne ap ho jayega...

इश्क़, खुशी, गम, तन्हाई या हो कुछ और भी,
हर भावना को उतार लाती हैं कागज पर,
जो हाल बया करदेती हैं दिलोंका बखूबी
वो कलम ही पहचान हैं हर शायर की।


ख़्वाबोंकि ख़ूबसूरती इतनी दिलचस्प होती हैं,
जो हर बार हकीकत की सच्चाई पर भारी पड़ जाती हैं।
मैं शायद पिछले जनम उसकी कर्जदार थी,
इसीलिए वो आया, यादे दी और चला गया।

मुहोब्बत की हैं तो थोड़ी तक्कुलुफ कीजिये जनाब,
कदम बढाइये और उसके गली के दो-एक चक्कर लगा ही आइये जनाब।


मुझे नही पसंद है  उसके बालोंका उससे यू शैतानी करना,
जहाँ सिर्फ और सिर्फ मेरा हक़ हैं कम्बख़्त वही चुम लेते हैं।


तुम जिसे बेपनाह, बेहिसाब, बेशुमार चाहते हो, 
वो भी तुम्हें चाहे ये जरूरी तो नही।
वो तुम्हे चाहे या ना चाहे ये उनका फैसला हैं,
पर तुम्हारा दिल उन्हें ना चाहे ये जरूरी तो नही ।


एक एक बात जिसकी याद रह जाए..
वो पर मज़ाक हर चीज़ ले जाए..
वो ना हो पाने की हर बात बता जाए..
हम्म सुनकर बस हल्का सा मुस्करा जाए.. ❤️


Unki chehere ki kya hi tareef kre
Unki nazre jab milti he toh 
Alag sa sukoon mehsoos hota
Jab mujhe Dekh vo hash dete
 Toh Mano me Kisi aur duniya me chali jati
Man karta unko palkho par bithaye
Rakhu par kambhakt vakt manzoori ni deta
Husn ki tareef toh mujhe aate hi ni
Unke muskan se nazre hi na jati


Vo pass hoke v dur he
Dur hoke v pass he
Iss rishte Ka naam ni
Khuda se pucho kya naam de isse

जिनके शहर के रस्ते तक कभी नही मिलते,
उन्हीके दिलके रस्ते मिलने थे?


जिनके दिल के रास्ते मिले..
वो शहर खुद बा खुद मिला लेते..
बस दिल की अहमियत समहजने वाला चाहे..
तुम्हारी अहमियत वो खुद बना देंगे 🤗❤️


बेहिसाब सा उसका इश्क़,
मेरी हर बात का हिसाब रखता हैं।


लहजा हो तो सही मुहोब्बत में,
मगर बराबरी का हो


Barabari yaha kuch nahi hota... 
Ek tarfa pyar sune hoge,woh ese hin nahi hota... 😇
Ek tarfa h na,
Aag dono trf lage to,
Jalne me maja h
Jalna aur jalane ka kaam unka hota he jo pyar me kisi ki kami mehsoos karte he... 
Agar mehsoos karna ho toh bezuban pyar ko karo jo nahi hoke bhi sab me hota he..


Pyar ki mehfil me hum yun barbaad huye he...
Pyar hum karte he unse aur woh kisi aur se... 
Rakib bada julm dhata he unpe...
Par haq humara unpe hoke bhi hum kuch kar nahi sakte...
Zalim ye duniya nahi yaha pe rehne wale log he... 
Bina matlb ke yaha koi apna nahi banta he... 
Yaha toh log paise tak ke liye bik jate he... 
Pyar aur izzat ki baat mat karo log iske layak hi nahi hote he...
Koun layak h aur koun nahi ye waqt pr chhod do
Tum apna kam krte raho aur layak bante raho

कुछ लोगोंके जज्बात गेहरे होते हैं
तो कुछ लोगोंके सिर्फ अल्फाज☺️


लोग कहते हैं मैं तन्हा बहुत रहती हूँ,
झूठ हैं यार, मेरे साथ तो उसकी यादोंका पूरा कारवां हैं


Un yaadon ka kya kehni he... 
Woh mere pyar ke karzdaar bante gaye... 
Aur me pyar unpe barsata raha... 
Samay samay ki baat he...
Woh mere pyar ke liye pagal hoti the... 
Aur aaj kisi aur ke liye hume chod gaye he...

मेरे आँखोंसे बहता हर एक आँसू 
सबूत हैं मेरी उसके लिए की वफ़ा का।
मेरे चेहरे पर बिछी उदासी
सबूत हैं मेरे उसे बेतहाशा चाहनेका।
मेरे लबोंसे रूठी मुस्कान,
सबूत हैं मेरी उसके लिए आशिकी का।
उलझी उलझी सी मैं,
सबूत हूँ किसीसे सच्ची पर बिखरी मुहोब्बत का।


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